
छत्तीसगढ़ की गोमती साय को गुजरात का जिम्मा (Photo Source- Patrika Create)
BJP Inside Story: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में हुए फेरबदल के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू हो गई है। पत्थलगांव विधायक और रायगढ़ की पूर्व सांसद गोमती साय को गुजरात भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया है। पार्टी की नई सूची में गुजरात के लिए तरुण चुघ को प्रभारी बनाया गया है, जबकि गोमती साय और अजय महावर को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ की एक सक्रिय महिला नेता को गुजरात जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक राज्य की जिम्मेदारी क्यों दी गई? भाजपा ने नियुक्ति का कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। ऐसे में गोमती साय के राजनीतिक सफर, संगठनात्मक अनुभव और उनकी नई भूमिका को साथ रखकर इस फैसले को समझा जा सकता है।
गोमती साय का राजनीतिक सफर स्थानीय स्तर से शुरू हुआ। वे 2005 से 2010 तक जशपुर जिला पंचायत सदस्य रहीं। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। 2019 में भाजपा ने उन्हें रायगढ़ लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वे सांसद चुनी गईं। 2023 में उन्होंने पत्थलगांव विधानसभा सीट से चुनाव जीता और वर्तमान में विधायक हैं।
यानी संगठन ने उन्हें स्थानीय निकाय से लेकर संसद और विधानसभा तक काम करने का अनुभव हासिल करने के बाद अब छत्तीसगढ़ से बाहर संगठनात्मक जिम्मेदारी दी है। यह नियुक्ति उनके लिए सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि दूसरे राज्य में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज को समझने और उसमें भूमिका निभाने का अवसर भी है।
गुजरात में गोमती साय की भूमिका सीधे प्रदेश संगठन के कामकाज से जुड़ी होगी। प्रभारी और सह-प्रभारी आम तौर पर प्रदेश संगठन से जुड़े कार्यों, पार्टी के कार्यक्रमों और केंद्रीय नेतृत्व तथा राज्य संगठन के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियों में भूमिका निभाते हैं। गुजरात के लिए भाजपा ने तरुण चुघ को प्रभारी बनाया है। उनके साथ गोमती साय और अजय महावर को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। ऐसे में गोमती साय अकेले गुजरात की जिम्मेदारी नहीं संभालेंगी, बल्कि पार्टी की तय संगठनात्मक टीम का हिस्सा होंगी।
गोमती साय की नियुक्ति का एक पहलू महिला नेतृत्व से भी जुड़ता है। छत्तीसगढ़ में विधायक और पूर्व सांसद के रूप में काम करने के बाद अब उन्हें दूसरे राज्य में संगठनात्मक भूमिका दी गई है। यह भूमिका उन्हें राज्य की चुनावी राजनीति से अलग संगठन के व्यापक कामकाज का अनुभव देगी। हालांकि इसे किसी आगामी चुनाव या किसी विशेष राजनीतिक रणनीति से जोड़ने के लिए अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि केंद्रीय संगठन ने उन्हें गुजरात में पार्टी के संगठनात्मक काम में शामिल किया है।
इस फेरबदल में केवल गोमती साय ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक सौरभ सिंह को भी दूसरे राज्य की जिम्मेदारी मिली है। उन्हें झारखंड भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया है। झारखंड में गजेंद्र पटेल प्रभारी हैं और सौरभ सिंह के साथ बिहार की निवेदिता सिंह को भी सह-प्रभारी बनाया गया है। एक ही सूची में छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को दूसरे राज्यों में संगठनात्मक भूमिका मिलना इस बात को सामने लाता है कि राष्ट्रीय संगठन राज्य के नेताओं को प्रदेश से बाहर भी जिम्मेदारियां दे रहा है।
गुजरात की जिम्मेदारी अब गोमती साय के राजनीतिक सफर का नया चरण है। स्थानीय निकाय से संसद और विधानसभा तक का अनुभव रखने वाली गोमती साय को अब दूसरे राज्य के संगठन के साथ काम करना होगा। यहां उनकी भूमिका केवल जनप्रतिनिधि के तौर पर नहीं, बल्कि भाजपा के संगठनात्मक ढांचे के हिस्से के रूप में होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी गोमती साय की नियुक्ति पर बधाई देते हुए उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के अनुभव का उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनके अनुभव का लाभ गुजरात संगठन को मिलेगा।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि गुजरात में गोमती साय को किस तरह के संगठनात्मक दायित्व मिलते हैं और वह छत्तीसगढ़ के अपने राजनीतिक अनुभव को वहां पार्टी के काम में किस तरह इस्तेमाल करती हैं। फिलहाल नियुक्ति ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि गोमती साय की राजनीतिक भूमिका अब छत्तीसगढ़ की सीमा से बाहर भी दिखाई देगी।
Updated on:
24 Sept 2026 02:00 pm
Published on:
24 Sept 2026 02:00 pm
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