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Chhattisgarh Mantralaya Bus: मंत्रालय की बसें कबाड़ के भरोसे, दरवाजा बंद किया, पर वायर बदलना भूले जिम्मेदार

Mantralaya Bus Service:मंत्रालय की पुरानी बसों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सीटें बढ़ाने के लिए दरवाजा बंद किया गया, जबकि पुरानी वायरिंग नहीं बदली गई
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Chhattisgarh Mantralaya Bus

मंत्रालय की बसें कबाड़ के भरोसे (Photo PatriKa)

Mantralaya Bus Service:@ अजय रघुवंशी। मंत्रालय और संचालनालय के कर्मचारियों को नवा रायपुर लाने-ले जाने वाली बसों में यात्रियों की सुरक्षा के साथ किस स्तर पर समझौता किया जा रहा है, यह पड़ताल में सामने आया है। एक तरफ जहां सीटें बढ़ाने के लिए बस का एक दरवाजा ही बंद कर दिया गया, वहीं वर्षों पुरानी वायरिंग बदलने की जहमत नहीं उठाई गई। 15 साल पुरानी बसों में रोजाना सैंकड़ों कर्मचारी सफर कर रहे हैं और मेंटेनेंस के नाम पर महज खानापूर्ति किए जाने के आरोप हैं। दो दिन पहले मंत्रालयीय कर्मचारियों की बस में आग लगने की घटना सामने आने के बाद विरोध-प्रदर्शन के बाद जांच समिति गठित की गई है। इसकी प्रारंभिक वजह शॉर्ट सर्किट बताई गई थी। पत्रिका ने पड़ताल में पाया कि कई बसों में पुरानी वायरिंग और यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

93 बसों में रोजाना 3500 कर्मचारी

रायपुर से नवा रायपुर के बीच रोजाना करीब 93 बसों का संचालन किया जाता है। इन बसों के संचालन के एवज में संबंधित कंपनी को प्रतिमाह करीब 90 लाख से एक करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। इस पूरे मामले में कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संघ के प्रतिनिधि मौके पर रहकर बसों की फिटनेस की निगरानी करेंगे।

अक्टूबर से नई बसों की तैयारी

प्रशासन ने अगले महीने होने वाले नए टेंडर में पुरानी बसों को हटाकर नई और आधुनिक बसों के संचालन का प्रावधान शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इससे लंबे समय से खस्ताहाल बसों में सफर कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

आगजनी की घटना के बाद यह निर्णय

  1. अब प्रत्येक बस में फिटनेस सर्टिफिकेट, तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट और चालक की स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट चस्पा करना अनिवार्य होगा।
  2. बसों में अग्निशामक यंत्र और चालू हालत में इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
  3. जो कर्मचारी अब मंत्रालय की बस सेवा का उपयोग नहीं कर रहे हैं, वे अपना बस पास सीधे अधीक्षण शाखा में जमा कर सकेंगे। इसके लिए एनओसी या अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी।
  4. आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। जांच के आधार पर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

फैक्ट फाइल

कुल बसें- 93

हर महीने कंपनी को कुल किराया- 90 लाख से 1 करोड़

बसों का संचालन प्रारंभ- वर्ष 2012

यात्रा करने वाले कुल कर्मचारी- लगभग 3500