
मंत्रालय की बसें कबाड़ के भरोसे (Photo PatriKa)
Mantralaya Bus Service:@ अजय रघुवंशी। मंत्रालय और संचालनालय के कर्मचारियों को नवा रायपुर लाने-ले जाने वाली बसों में यात्रियों की सुरक्षा के साथ किस स्तर पर समझौता किया जा रहा है, यह पड़ताल में सामने आया है। एक तरफ जहां सीटें बढ़ाने के लिए बस का एक दरवाजा ही बंद कर दिया गया, वहीं वर्षों पुरानी वायरिंग बदलने की जहमत नहीं उठाई गई। 15 साल पुरानी बसों में रोजाना सैंकड़ों कर्मचारी सफर कर रहे हैं और मेंटेनेंस के नाम पर महज खानापूर्ति किए जाने के आरोप हैं। दो दिन पहले मंत्रालयीय कर्मचारियों की बस में आग लगने की घटना सामने आने के बाद विरोध-प्रदर्शन के बाद जांच समिति गठित की गई है। इसकी प्रारंभिक वजह शॉर्ट सर्किट बताई गई थी। पत्रिका ने पड़ताल में पाया कि कई बसों में पुरानी वायरिंग और यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
रायपुर से नवा रायपुर के बीच रोजाना करीब 93 बसों का संचालन किया जाता है। इन बसों के संचालन के एवज में संबंधित कंपनी को प्रतिमाह करीब 90 लाख से एक करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। इस पूरे मामले में कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संघ के प्रतिनिधि मौके पर रहकर बसों की फिटनेस की निगरानी करेंगे।
प्रशासन ने अगले महीने होने वाले नए टेंडर में पुरानी बसों को हटाकर नई और आधुनिक बसों के संचालन का प्रावधान शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इससे लंबे समय से खस्ताहाल बसों में सफर कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल बसें- 93
हर महीने कंपनी को कुल किराया- 90 लाख से 1 करोड़
बसों का संचालन प्रारंभ- वर्ष 2012
यात्रा करने वाले कुल कर्मचारी- लगभग 3500
Updated on:
26 Sept 2026 08:58 am
Published on:
26 Sept 2026 08:58 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
