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मिलिए छत्तीसगढ़ की ‘नाचे मयूरी’ से

चंचला पटेल स्पेशल एजुकेटर हैं, योग भी सिखा रहीं
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रायपुर

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ताबीर हुसैन

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Updated: 25 Apr 2022, 11:18 PM IST

मिलिए छत्तीसगढ़ की 'नाचे मयूरी' से

हादसे ने पैर छीना लेकिन चंचला ने उम्मीद नहीं।

ताबीर हुसैन @ रायपुर. दुर्घटना में जब मैंने पैर गंवाए तो पापा छिपकर रोया करते थे। मुझे इस बात का अहसास था लेकिन मैं मजबूत थी क्योंकि मुझे जीना था। बेड पर पड़े हुए मैं पैरेंट्स का हौसला बढ़ाया करती थी कि मुझे कुछ नहीं होगा। इलाज के लिए पिता ने जमीन बेची और मां ने गहने। आज मैं खुश हूं कि इंडिपेंडेंट हूं। स्पेशल एजुकेटर तो हूं ही, नई पीढ़़ी को योग भी सिखा रही हूं। यह कहा चंचला पटेल ने। छत्तीसगढ़ योग आयोग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वे बतौर प्रतिभागी शामिल हुईं। पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा कि दोस्तों ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। यही वजह है कि मैं एक पैर से डांस भी कर लेती हूं।

30 की उम्र के बाद योग सीखा

मैं रायगढ़ के एक निजी स्कूल में विशेष शिक्षक हूं। हमारे यहां योग की क्लास भी लगती है। योग टीचर अचानक से छुट्टी पर चले गए। मैंने वैकल्पिक तौर पर बच्चों को योग सिखाना शुरू किया। मुझे इसमें इंटे्रस्ट आने लगा तो मैंने ऑनलाइन डिप्लोमा क्लास ज्वाइन किया। सभी तरह के आसन तो नहीं कर पाती क्योंकि मैं 30 की उम्र के बाद योग सीखी और सिखाने लगी।

रियलिटी शो में भी मिला मौका, पर जा नहीं पाई

रियलिटी शो हुनरबाज में मुझे मौका मिला। पिछले साल 8 अक्टूबर को मैंने रायपुर में ही ऑडिशन दिया। मुझे मुंबई के लिए कॉल भी आया लेकिन उन्हीं दिनों मैं गिरकर चोटिल हो गई थी। पैर में चोट आने की वजह से नहीं जा पाई। वैसे भी 10 से ज्यादा सर्जरी हो चुकी है।

प्रभु देवा, फराह खान ने सराहा

बेस्ट टीचर अवॉर्ड के अलावा कई सम्मान मिल चुके हैं। किरण बेदी की संस्था योद्धा ने मुझे आमंत्रित कर पुरस्कृत किया। इसके अलावा स्वयं सिद्धा फाउंडेशन विश्व संवाद परिवार और परशुराम फाउंडेशन ने भी सम्मानित किया। एक ऑनलाइन डांस परफॉर्मेंस में मुझे विनर घोषित किया गया। इसमें बतौर गेस्ट प्रभु देवा, फराह खान और रामचंद्रन मौजूद थे। मेरे जीवन की एक और उपलब्धि रही कि मैंने भारतीय सेना की ट्रेकिंग में सियाचीन-ग्लेशियर गई। यह वल्र्ड रेकॉर्ड बना था।