7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, सभी 33 जिला कलेक्टरों को मिली बड़ी पावर, 31 दिसंबर तक NSA लागू

Chhattisgarh News: एनएसए के कानून के तहत सभी कलेक्टरों को कार्रवाई करने के लिए विशेष अधिकार रहेगा। जारी आदेश के अनुसार प्रदेश में 1 अक्टूबर से लेकर 31 दिसंबर 2026 तक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू रहेगा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Chandu Nirmalkar

•

Updated: 23 Sep 2026, 1:51 PM IST

Chhattisgarh govt news

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ( Photo - DPR Chhattisgarh )

NSA in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिला कलेक्टरों को बड़ी पावर मिल गई है। दरअसल साय सरकार ने प्रदेश में अगले तीन महीने तक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लागू करने का फैसला लिया है। एनएसए के कानून के तहत सभी कलेक्टरों को कार्रवाई करने के लिए विशेष अधिकार रहेगा। जारी आदेश के अनुसार प्रदेश में 1 अक्टूबर से लेकर 31 दिसंबर 2026 तक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू रहेगा।

1 अक्टूबर से लागू

साय सरकार ने राज्य में 1 अक्टूबर से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA - रासुका) लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। इस आदेश के तहत राज्य के सभी 33 जिला कलेक्टरों (DM) को विशेष अधिकार और बड़ी पावर दी गई है। इसके लागू होने के बाद अब जिला कलेक्टर लोक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संदिग्ध और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सीधे रासुका (NSA) के तहत निवारक निरोध (Preventive Detention) की कार्रवाई कर सकेंगे। राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना है।

Chhattisgarh News: क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है। यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध नागरिक को हिरासत में लेने की शक्ति देता है। इस कानून तहत किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उनके खिलाफ आरोप तय किए बिना 10 दिनों के लिए रखा जा सकता है।

क्या कर सकेंगे कलेक्टर?

इस आदेश के बाद कलेक्टरों को निवारक गिरफ्तारी यानी निवारक निरोध की शक्ति मिल गई है। अगर किसी व्यक्ति के बारे में लगे कि उसकी गतिविधियां लोक शांति, राज्य की सुरक्षा या जरूरी सेवाओं के लिए खतरा हैं, तो कलेक्टर उसे बिना मुकदमे के हिरासत में लेने का आदेश दे सकते हैं।