इस आदेश के बाद कलेक्टरों को निवारक गिरफ्तारी यानी निवारक निरोध की शक्ति मिल गई है। अगर किसी व्यक्ति के बारे में लगे कि उसकी गतिविधियां लोक शांति, राज्य की सुरक्षा या जरूरी सेवाओं के लिए खतरा हैं, तो कलेक्टर उसे बिना मुकदमे के हिरासत में लेने का आदेश दे सकते हैं।