
स्काईवॉक का मचान हटा (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh News: राजधानी रायपुर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील मेकाहारा (आंबेडकर अस्पताल) चौक पर महीनों से राहगीरों, मरीजों और एंबुलेंस के लिए काल बन चुका स्काईवॉक का भारी-भरकम मचान आखिरकार प्रशासन को हटाना ही पड़ा। पत्रिका ने बीते 13 अक्टूबर के अंक में 'स्काईवॉक के स्ट्रक्चर ने निगला रास्ता, मेकाहारा चौक पर महाजाम' शीर्षक से जमीनी पड़ताल छापी थी। इसमें बताया गया था कि कैसे सौंदर्यीकरण और निर्माण के नाम पर आधी से ज्यादा सड़क को लोहे की बल्लियों और मचान से घेरकर छोड़ दिया गया था, जिससे हर दिन हजारों वाहन रेंगने को मजबूर थे और सायरन बजाती एंबुलेंस जाम में तड़प रही थीं।
खबर छपते ही पीडब्ल्यूडी और निर्माण एजेंसी में हड़कंप मच गया। उच्च स्तर से पड़े दबाव के बाद ठेकेदार ने लेबर की संख्या बढ़ाई और एक तरफ का स्ट्रक्चरल व फिनिशिंग कार्य आनन-फानन में पूरा कर सड़क पर पसरे मचान को आगे शिफ्ट कर दिया। शनिवार को जैसे ही बैरिकेडिंग और बल्लियां हटाई गईं, चौड़ी सड़क देखकर राहगीरों ने बड़ी राहत की सांस ली।
आंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) के इमरजेंसी वार्ड की तरफ जाने वाली एंबुलेंस अब चौक के बॉटलनेक में नहीं फंस रहीं। 3 से 4 मिनट की सीधी बचत हो रही है, जो गंभीर मरीजों के लिए 'गोल्डन ऑवर' साबित होगी।
जयस्तंभ चौक, शारदा चौक और रेलवे स्टेशन की तरफ से आकर फाफाडीह व मोवा जाने वाले वाहनों को पीक ऑवर्स में 15 से 20 मिनट तक सिग्नल पर खड़ा नहीं रहना पड़ेगा।
रात के वक्त अंधेरे में सड़क पर अचानक उभरी लोहे की रॉड और एंगल से दोपहिया चालकों के टकराने का जो जानलेवा खतरा था, वह अब खत्म हो गया है।
रमेश साहू, दैनिक राहगीर के मुताबिक, "मेकाहारा चौक पर स्काईवॉक का काम जिस सुस्त रफ्तार से चल रहा था, उससे रोज का निकलना नर्क बन चुका था। पत्रिका ने जब अस्पताल और एंबुलेंस का मुद्दा उठाया, तब जाकर अफसरों के कान पर जूं रेंगी। सड़क खुलते ही अब ट्रैफिक का दम घुटना बंद हुआ है।"
Updated on:
18 Oct 2026 12:35 pm
Published on:
18 Oct 2026 12:35 pm
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