8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

छत्तीसगढ़ के कई मेडिकल कॉलेज खतरे में… अच्छी पढाई के लिए फैकल्टी की कमी, NMC ने थमाया नोटिस

CG Education : प्रदेश के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों महासमुंद, कांकेर व रायगढ़ की मान्यता खतरे में आ गई है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Kanakdurga jha

•

Updated: 1 Dec 2023, 9:18 AM IST

महासमुंद, कांकेर व रायगढ़ मेडिकल कॉलेजों की मान्यता खतरे में पड़ी

महासमुंद, कांकेर व रायगढ़ मेडिकल कॉलेजों की मान्यता खतरे में पड़ी

रायपुर। CG Education : प्रदेश के तीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों महासमुंद, कांकेर व रायगढ़ की मान्यता खतरे में आ गई है। इसका कारण तीनों कॉलेजों में फैकल्टी की कमी है। नेशनल मेडिकल कमीशन ने इन कॉलेजों को शोकॉज नोटिस थमा दिया है। नोटिस में फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए 15 दिनों में जवाब मांगा गया है। इससे इन कॉलेजों के हाथ-पांव फुल गए हैं। तीनों कॉलेजों में एमबीबीएस की 375 सीटें हैं। फैकल्टी की कमी केवल इन तीनों कॉलेजों में नहीं है, बल्कि कोरबा, दुर्ग, जगदलपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर में भी है। हालांकि अभी इन कॉलेजों को एनएमसी का कोई नोटिस नहीं मिला है।

यह भी पढ़ें : लापरवाही से हुई जानवरों की मौत ... जंगल सफारी में 5 दिन में 17 चौसिंगा ने गंवाई जान, मचा हड़कंप


मेडिकल कॉलेज के कुछ विभागों में ज्यादा डॉक्टर

रायगढ़ पुराना कॉलेज है। वहीं कांकेर व महासमुंद नया कॉलेज है। रायगढ़ को खुले 10 साल से ज्यादा हो गए हैं। वहीं कांकेर को तीन साल व महासमुंद में मेडिकल कॉलेज को चालू हुए दो साल हुए है। इन कॉलेजों में फैकल्टी की कमी तो है। एनएमसी के मापदंड के अनुसार न प्रोफेसर है और न ही एसोसिएट प्रोफेसर। असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ सीनियर रेसीडेंट डॉक्टरों की कमी भी बनी हुई है। इन कॉलेजों में फैकल्टी की कमी कैसे दूर होगी, यह सोचने वाली बात है। दरअसल केवल रायपुर मेडिकल कॉलेज के कुछ विभागों में जरूरत से ज्यादा डॉक्टर हैं। ये डॉक्टर 20 से 22 साल से जमे हुए हैं। मान्यता पर खतरा होते देख इन डॉक्टरों को नए कॉलेजों में ट्रांसफर किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें : IND Vs AUS T-20 : टिकट के लिए क्रिकेट प्रेमियों का छूटा पसीना, हजारों रुपए लगाने के बाद भी आधे रात तक लगे लाइन में...


8 साल पहले भी डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए पड़ोसी राज्यों में जाकर वॉक इन इंटरव्यू किया गया था। राजनांदगांव व जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों के लिए महाराष्ट्र व ओडिशा जाकर डॉक्टरों की खोज की गई। राजनांदगांव कॉलेज में महाराष्ट्र के काफी डॉक्टर हैं। प्रदेश में संविदा डॉक्टरों को 95 हजार से 2.40 लाख रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है। कांकेर, जगदलपुर व कोरबा कॉलेज अनुसूचित क्षेत्र में है। इसलिए वहां डॉक्टरों का वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया है। हालांकि इसे अभी स्वीकृत नहीं मिली है।

जिन कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी है, उसे दूर किया जाएगा। डीन को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। मान्यता पर खतरा नहीं आएगी।
डॉ. विष्णु दत्त, डीएमई छग
&फैकल्टी की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। नए कॉलेजों में फैकल्टी कम है। ये स्थिति दूसरे राज्यों में भी बनी हुई है।
डॉ. सत्येंद्र फुलझेले, डीन महासमुंद
&एनएमसी के कुछ मेंबरों से बात हुई तो पता चला कि ये नोटिस धोखे से आ गया है। फैकल्टी की कुछ कमी तो है, जिसे दूर किया जा रहा है।
डॉ. पीएम लूका, डीन रायगढ़