
सरकारी बैंकों के 3,893 करोड़ 'डूबत' खाते में (Photo AI)
Chhattisgarh NPA: @अजय रघुवंशी। आम आदमी की यदि एक महीने की किस्त चूक जाए, तो बैंक और उनके रिकवरी एजेंट उस पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। लेकिन दूसरी ओर, बड़े-बड़े रसूखदारों और डिफॉल्टरों पर यही बैंक दरियादिली दिखाते नजर आ रहे हैं। 'पत्रिका' की विशेष पड़ताल में प्रदेश के बैंकिंग तंत्र की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की जून 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के बैंकों का कुल एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति या डूबत कर्ज) बढ़कर 6,216 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि डूबत कर्ज के इस खेल में सबसे बड़ा नुकसान आम जनता के पैसे से चलने वाले सरकारी बैंकों को हुआ है।
कुल एनपीए की लगभग 62 से 63 प्रतिशत राशि (3893 करोड़ रुपए) अकेले सरकारी बैंकों की फंसी हुई है। इसके मुकाबले बेहतर रिकवरी सिस्टम के कारण निजी (प्राइवेट) बैंकों की स्थिति काफी बेहतर है। अब चिंता इस बात की भी है कि सहकारी और ग्रामीण बैंकों में भी कर्ज न चुकाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मामलों के लटकने से परेशान बैंकर्स समिति ने राज्य सरकार के वित्त विभाग से मदद मांगी है। बैंकों ने पत्र लिखकर मांग की है कि जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं ताकि सरफेसी एक्ट की कार्रवाई में तेजी आए। साथ ही 60 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटारा किया जाए।
'पत्रिका पड़ताल' के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारें कृषि, छोटे-मझोले उद्योगों और युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन देने पर लगातार जोर दे रही हैं। लेकिन इन्हीं सेक्टरों में डिफॉल्ट की दर सबसे अधिक है। लघु एवं मध्यम उद्योग में सरकारी बैंकों का इसमें सबसे ज्यादा 1659.84 करोड़ रुपए और निजी बैंकों का 462 करोड़ रुपए एनपीए हो चुका है। कृषि क्षेत्र में सरकारी बैंकों के 81492 करोड़ रुपए और निजी बैंकों के 580 करोड़ रुपए फंसे हैं। एजुकेशन लोन में सरकारी बैंकों के 37.87 करोड़ तो हाउसिंग लोन में 129.44 करोड़ रुपए डूबे हैं।
कर्ज वसूली के लिए बैंकों के पास 'सरफेसी एक्ट' जैसा सख्त कानून है, लेकिन रसूखदारों के आगे यह भी सुस्त नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में सरफेसी एक्ट के तहत कुल 848 मामलों में 409 करोड़ रुपए की बंधक संपत्तियों पर बैंक आज तक भौतिक कब्जा नहीं ले पाए हैं। ये मामले जिला प्रशासन और अदालतों में लंबित पड़े हैं।
बैंक का प्रकार मार्च 2026 (लोन) मार्च 2026 (NPA) जून 2026 (लोन) जून 2026 (NPA)सार्वजनिक (सरकारी) बैंक ₹1,57,076 ₹3,860 ₹1,67,685 ₹3,893
निजी (प्राइवेट) बैंक ₹91,797 ₹1,497 ₹94,388 ₹1,592सहकारी बैंक ₹4,327 ₹277 ₹8,994 ₹297
छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक ₹11,811 ₹196 ₹12,125 ₹214
स्मॉल फाइनेंस बैंक ₹5,601 ₹190 ₹5,817 ₹219
कुल योग ₹2,70,615 ₹6,022 (2.23%) ₹2,88,960 ₹6,216 (2.15%)
सेक्टर-वाइज एनपीए की स्थिति (जून 2026)
एग्रीकल्चर: सरकारी बैंक – ₹814.92 करोड़ | निजी बैंक – ₹580 करोड़
एमएसएमई : सरकारी बैंक – ₹1,659.84 करोड़ | निजी बैंक – ₹462 करोड़
एजुकेशन: सरकारी बैंक – ₹37.87 करोड़ | निजी बैंक – ₹0.76 करोड़
हाउसिंग: सरकारी बैंक – ₹129.44 करोड़ | निजी बैंक – ₹41.81 करोड़
सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकारी बैंक – ₹0.01 करोड़ | निजी बैंक – ₹0.02 करोड़
सरकारी बैंकों पर सोशल बैंकिंग (जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत लोन देने) का भारी दबाव रहता है। हालांकि, सरकारी बैंकों को लोन रिकवरी के लिए और अधिक अधिकार व छूट दी जानी चाहिए, साथ ही इसकी पारदर्शी मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है।
:शिरीष नलगुंडवार, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन
सरफेसी एक्ट का मुख्य उद्देश्य बैंकों के फंसे हुए कर्ज की तेजी से वसूली करना है। इसके तहत बैंकों को गिरवी या बंधक रखी गई संपत्ति को जब्त करने और नीलाम करने का अधिकार मिलता है। हालांकि, यह कार्रवाई केवल उन्हीं खातों पर हो सकती है जिनमें वैध संपत्ति बंधक रखी गई हो।
Updated on:
20 Sept 2026 10:39 am
Published on:
20 Sept 2026 10:39 am
