
रायपुर। प्रदेश में कोरोना ग्राफ बढऩे के बाद वैक्सीनेशन में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है। शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी- कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर सेवा दे रहे है। कोरोनाकाल में बिना ट्रेनिंग ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षकों ने नाराजगी जताई है।
शिक्षकों का कहना है कि ट्रेनिंग के बाद विनहीं भागीय अधिकारी ड्यूटी लगा देते, तो संक्रमण की चपेट में आने की आशंका कम हो जाती है। विभागीय अधिकारियों ने कांट्रेक्ट ट्रेसिंग, सर्वे और पंजीयन करने में ड्यूटी लगा रखी है। किट भी विभाग के जिम्मेदार मुहैय्या नहीं करवा पा रहे है। मास्क व सेनिटाइजर खुद के पैसों से खरीदना पड़ रहा है। शिक्षक संघों ने शिक्षकों की इन शिकायतों का समाधान विभागीय अधिकारियों से मांगा है।
संक्रमित हुए तो नहीं मिल रही सुविधा
शिक्षक संघों की मानें तो विभागीय अधिकारियों ने शिक्षकों की कोविड ड्यूटीलगा दी है, लेकिन उन्हें सुविधा नहीं दी जा रही है। यदि कोई शिक्षक कोरोना संक्रमण की चपेट में आ जाता है, तो उसको खुद के पैसे से अपना इलाज कराना पड़ रहा है। शिक्षकों की विभागीय कार्यों के साथ अतिरिक्त रूप से कांट्रेक्ट ट्रेसिंग, सर्वे और पंजीयन करने में ड्यूटी लगाई गई है।
बीमा कराने की मांग
शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा, कि शिक्षको को फ्रंट लाइन वारियर माना जाए और उन्हें बीमा की सुविधा दी जाए। पिछले सत्र कोरोना काल में 35 से ज्यादा शिक्षकों की मौत हुई है। इस वर्ष दो दर्जन से ज्यादा शिक्षक कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके है। शिक्षको को कोरोना वारियर मानने और सुविधा मुहैय्या कराने के बाद ड्यूटी लगाने की मांग संघ ने की है।
Published on:
16 Apr 2021 12:43 pm
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