
बदलते मौसम से लोग हुए बीमार, जिला अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या
रायसेन। बदलते मौसम के मिजाज का असर लोगों की सेहत पर भी पडऩे लगा है।तेज धूप उमस गर्मी के बाद अचानक बदले मौसम के कारण लोग बीमार पडऩे लगे हैं। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में हो रहे इजाफे की वजह से पलंग हाउसफुल होने लगे हैं। चिकित्सकों के अनुसार बुखार, उल्टीदस्त के साथ ही पेटदर्द, शरीर में जलन और बदन में अकडऩ और पीलिया, डायरिया की शिकायतें ज्यादा आ रही है। शनिवार को मरीजों की भीड़ का नजारा ओपीडी पंजीयन और दवा वितरण विंडो में देखने को मिला।
इनमें डॉक्टरों ने ज्यादा मरीजों की सेहत जांचने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया।जिला अस्पताल के मेडिकल सर्जिकल समेत बच्चा महिला, पुरूष वार्डों में क्षमता से अधिक मरीजों को इलाज कराने रखना पड़ रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ गुरिंदर सिंह, डॉ. आलोक राय ने बताया कि बारिश की वजह से वातावरण में नमी बढ़ जाती है। इसीलिए बुखार के वायरस संक्रमण होकर बच्चों को बीमार कर देते हैं। इसमें वायरल फीवर,बच्चों को निमोनिया, मलेरिया भी होने लगता है।
शनिवार को सुबह १० बजे से ही मरीजों की भीड़ जिला अस्पताल में उमडऩे लगी थी।सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की भारी भीड़ पंजीयन कराने ,दवा वितरण विंडों समेत ओपीडी में डॉक्टरों के पास इलाज कराने लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। कमोवेश यही नजारे शाम की ओपीडी के भी रहे ।डॉक्टरों के मुताबिक गंदा पानी पीने से पीलिया होने लगा है। मलेरिया के अलावा वायरल फीवर डायरिया और उल्टीदस्त के मरीजों की संख्या बढऩे लगी है।इसके अलावा डॉक्टरों के निवास और शहर के प्राइवेट दवाखानों पर भी बीमार मरीजों की लाइनें देखने को मिल रही हैं। इतने ही जिले के अस्पताल से रैफर होकर मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल पहुंचते हैं। ओपीडी के सूत्रों के अनुसार पिछलेएक सप्ताह में ६८९३ मरीज इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे हैं।
मरीज ये रखें सावधानी .....
* मरीज दूषित सामग्री बासे भोजन खाने से बचें ।
* बारिश में भीगने से बचें ,क्योंकि पानी से सर्दी जुकाम से बीमार पडऩे की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।
* पानी पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पीना चाहिए।
* बुखार के लक्षण दिखने पर तुरंत जिला अस्पताल जाकर डॉक्टरों से चेकअप कराएं ।
* तेल की तली वस्तुएं खाने से बचें।
दो दिनों तक नहीं उठता कंटेनर से कचरा
जिला अस्पताल की मेल फीमेल सहित अन्य वार्डों में रखे हरे पीले लाल रंग के कंटेनरों में मेडिकल बेस्ट दो से तीन दिनों तक नहीं उठाया जाता। इसके चलते कंटेनरों के आसपास मच्छर- मक्खियां भिनभिनाते रहते हैं। संक्रमण से मरीजों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इन कंटेनरों में सीरींज से लेकर ग्लूकोज बाटलें नली पाइप आदि डाले जाते हैं। कई बार तो मरीजों केपरिजन इनमें पान गुटखा खाकर थूूक भी देते हैं। जबकि लोगों को ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अस्पताल में स्वच्छता का पूरा ख्याल रखना जरूरी होता है।
मौसम के बदलाव की वजह से मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने लगी है। अस्पताल के वार्डों में रखे कंटेनरों ेस मेडिकल बेस्ट उठवाने के जिम्मेदार सफाकर्मियों को आदेश देंगे।बदलते मौसम के कारण लोगों को अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखना चाहिए। खासतौर सेपानी को उबालकर छानकर पीना जरूरी है।
डॉ.बीबी गुप्ता सिविल सर्जन रायसेन
Published on:
9 Jun 2018, 5:42 PM IST
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