
लाइन हेल्पर जगदीश कुशवाह की जीवित अवस्था की तस्वीर (फोटो सोर्स: Patrika)
Rajgarh News : मध्य प्रदेश में बिजली लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामला राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ के अंतर्गत आने वाले गाड़िया डीसी के ग्राम अंधलहेड़ा से सामने आया है, जहां डीपी पर काम करते समय आउटसोर्स लाइन हेल्पर जगदीश कुशवाह की करंट लगने से मौत हो गई। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल ये है कि, जब डीपी पर तकनीकी काम किया जा रहा था, तब बिजली सप्लाई किसकी अनुमति से चालू हुई? काम के दौरान शटडाउन और परमिट की प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं? साथ ही, सुरक्षा के लिए जरूरी अर्थिंग रॉड का इस्तेमाल हुआ था या नहीं?
जानकारी के अनुसार, जगदीश डीपी पर काम कर रहा था, तभी अचानक लाइन में करंट दौड़ पड़ा, जिसकी चपेट में आने से वो गंभीर रूप से झुलस गया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां तमाम कोशिशों के बाद भी उसकी जान चली गई। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजन के सुपुर्द कर दिया गया है। घटना के बाद कर्मचारियों के बीच ये चर्चा भी है कि, लाइनमैन की जगह आउटसोर्स हेल्पर से तकनीकी काम कराया जा रहा था। हालांकि, इस संबंध में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बिजली लाइन और डीपी पर काम के दौरान सप्लाई बंद कराने, परमिट लेने और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया अहम होती है। ऐसे में हादसे के बाद यह जांच जरूरी है कि जगदीश के काम शुरू करने से पहले शटडाउन लिया गया था या नहीं, परमिट किसके नाम से जारी हुआ था और लाइन को सुरक्षित करने के लिए अर्थिंग की व्यवस्था की गई थी या नहीं। अगर सप्लाई बंद थी तो करंट कैसे पहुंचा और अगर शटडाउन नहीं लिया गया था तो कर्मचारी को काम पर किसने लगाया, इन सवालों के जवाब जांच में सामने आने चाहिए।
घटना के बाद सवाल ये भी उठ रहा है कि, आउटसोर्स लाइन हेल्पर को डीपी जैसे जोखिमपूर्ण स्थान पर काम करने की जिम्मेदारी क्यों दी गई। क्या उसके साथ प्रशिक्षित लाइनमैन मौजूद था? क्या उसे जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे? बिजली कंपनी और संबंधित अधिकारियों को इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। फिलहाल, हादसे में लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी है, ये जांच का विषय है।
मामले को लेकर जेई निलेश यादव का कहना है कि, मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही हादसे के कारणों और जिम्मेदारी के संबंध में कुछ कहा जा सकेगा। उन्होंने पीड़ित परिवार को मदद दिलाने की बात भी कही है।
बिजली लाइन पर काम के दौरान करंट से कर्मचारियों की मौत का ये पहला मामला नहीं है। साल 2024 में सोनकच्छ में भी करंट की चपेट में आने से चार कर्मचारियों में से दो की मौत हो गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा प्रक्रिया और मौके पर कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर सवाल फिर सामने हैं। अंधलहेड़ा की घटना ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि, बिजली व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों की जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा?
Updated on:
5 Nov 2026, 7:38 PM IST
Published on:
5 Nov 2026, 7:38 PM IST
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