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राजगढ़ में बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई और खेत पर पड़ रहा असर, पत्रिका के सर्वे में खुली पोल

Rajgarh Power Cuts Survey: पत्रिका सर्वे में 95% लोग बोले- बिना बताए गुल हो रही बिजली, 85% ने कंपनी-प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार, उग्र आंदोलन की चेतावनी, 80% ने खेती और बच्चों की पढ़ाई पर असर बताया।
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rajgarh power cut

power cuts patrika survey, एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर (Source-Gemini)

Rajgarh Power Cuts Survey: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में हो रही अघोषित बिजली कटौती से आम जनजीवन बेहाल है। पत्रिका के सर्वे में शामिल लोगों ने लचर हो चुकी विद्युत व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जताई है। सर्वे में शामिल 200 लोगों में से 95% से अधिक ने अघोषित कटौती पर नाराजगी जताई है, तो वहीं 70% से अधिक लोगों के मुताबिक, उन्हें दिन-रात मिलाकर महज 4 से 10 घंटे बिजली मिल रही है। करीब 80% लोगों ने खेती-किसानी और बच्चों की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा असर बताया। इसके साथ ही करीब 85% ने बिजली कंपनी और स्थानीय प्रशासन को संकट के लिए जिम्मेदार माना है। आप भी इस लिंक पर क्लिक करे सर्वे में शामिल होकर अपनी बात रख सकते हैं https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSfOPNFgM-imCd6ja_NHms8d3e3OYzMaidvc6HtvzdGZC5JvCQ/viewform

कभी भी गुल हो रही बत्ती, शेड्यूल का पता नहीं

सर्वे में 95% से अधिक उपभोक्ताओं ने कहा कि बिजली बंद करने से पहले कोई सूचना नहीं दी जाती। अचानक बिजली गुल होने से घरेलू कामकाज और दिनचर्या प्रभावित हो रही है। 70% से अधिक लोगों के अनुसार, उन्हें 24 घंटे में महज 4 से 10 घंटे बिजली मिल रही है। कुछ क्षेत्रों में आपूर्ति 3 से 5 घंटे तक सिमटने की बात भी सामने आई। लोगों की परेशानी कम बिजली मिलने के साथ उसकी अनिश्चितता भी है। उन्हें पता नहीं रहता कि बिजली कब जाएगी और कब आएगी

खेती और बच्चों की पढ़ाई पर संकट

सर्वे में करीब 80% लोगों ने खेती-किसानी और बच्चों की पढ़ाई को बिजली संकट से जुड़ी सबसे बड़ी परेशानी बताया है। रबी सीजन में सिंचाई और लहसुन जैसी फसलों के लिए बिजली नहीं मिलने से किसान चिंतित हैं। वहीं, परीक्षाओं के दौरान अघोषित बिजली कटौती बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन रही है। करीब 70% लोगों ने पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को भी प्रमुख समस्या बताया। बिजली बंद होने से पानी की मोटरें और नल-जल योजनाएं प्रभावित होती हैं। इससे घरों तक पानी पहुंचने में दिक्कत आती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।

85% ने कंपनी-प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार

अघोषित बिजली कटौती को लेकर कराए गए सर्वे में लोगों का गुस्सा जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों के प्रति भी सामने आया। सर्वे में करीब 85% लोगों ने बिजली कंपनी और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार माना। वहीं, 60% से अधिक प्रतिक्रियाओं में सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। सर्वे में सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ लोगों ने भी बिजली कटौती की बात को स्वीकार किया है।