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झील को सम्भावित खतरों से चिंता- डीएमएफटी मद का पैसा पर्यावरण और प्रकृति के पुनर्वास में लगाएं, झील से अतिक्रमण हटें

बुद्धिजीवियों ने की संगोष्ठी, प्रकृति-पर्यावरण बचाने पर चर्चा  
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प्रकृति-पर्यावरण से जुड़े बुद्धिजीवियों की लोक अधिकार मंच, नगर विकास समिति तथा प्रकृति मानव केंद्रित जनांदोलन संस्था के तत्वावधान में बैठक यहां हुई। नगर विकास समिति अध्यक्ष तथा लोक अधिकार मंच राष्ट्रीय अध्यक्ष सम्पतलाल लढ्ढा, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सोहनलाल रेगर, जिलाध्यक्ष भैरूशंकर तथा भागचंद बोरीवाल मौजूद थे।

इन्होंने भी रखे विचार
संभागीय अध्यक्ष भरत कुमावत, तेजराम कुमावत, भागचंद बोरीवाल, एन.एल. वर्मा, विचार गोष्ठी में कैलाशचंद्र पुरोहित, महेश चंद्र बग्रवाल, बंशीलाल रांका।

इन मुद्दों पर चर्चा
- पर्यावरण की अनदेखी के चलते झील से मात्र एक किमी दूर केलवा और आमेट में भी भीषण जलसंकट है। बड़ी मात्रा में मार्बल अपशिष्ट एवं स्लरी बहकर झील को प्रदूषित कर रही है। लोगों में फ्लोरोसिस एवं पथरी की समस्याएं निरंतर बढ़ती जा रही है। शीघ्र निराकरण के उपाय नहीं हुए तो गम्भीर मानवीय दुष्प्रभाव होंगे।
- डीएमएफटी एक्ट के प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन व राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा। इसे रोकना जरूरी। डीएमएफटी फंड माइनिंग के दुष्प्रभाव को दूर करने एवं प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए बनाया कोष है।
- वर्तमान में औद्योगिक पूंजीवादी तबके ने विकास की भ्रामक अवधारणा को प्रचारित कर अंध उपभोगवाद को बढ़ावा दिया व पंचतत्वों को पूर्ण प्रदूषित कर दिया। इसके दुष्प्रभावों से एक दशक से भी कम समय में मानव जाति के खात्मे का खतरा उत्पन्न हो गया है।
- विकास के नाम पर प्रकृति, पर्यावरण, झील, कृषि और वायुमंडल प्रदूषण निरंतर बढ़ता जा रहा है। जागरूक नागरिकों, संस्थाओं, संगठनों को संगठित कर रोकथाम और सुधार के लिए सामूहिक व व्यापक जनजागरण का संकल्प लिया।
- धनबल के प्रभाव से कानूनी अवहेलना से बचने की युक्ति का मुकाबला करने के लिए 15 सूत्रीय कार्यक्रम प्रस्तावित किया। आगामी दिनों में कार्यशाला होगी।
- एक समिति फील्ड में वस्तुस्थिति का आकलन करेगी। वैज्ञानिक तरीके से प्रकृति-पर्यावरण के पुन:सुधार के कार्यों को बढ़ावा देगी।
- झील के कैचमेंट एरिया में बेतरतीब खनन से झील भराव में आ रही बाधाओं के कारण आगामी समय में राजसमंद निवासियों को बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। खदानों में भरा पानी नहर के माध्यम से झील में पहुंचाने का प्रबंध हो।
- शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी जागरुक किया जाए। स्थानीय स्तर पर बेरोजगारों को कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से तैयार कर प्रकृति-पर्यावरण संरक्षण में नियोजित करें। इससे बेरोजगारी घटेगी व पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिलेगी।
- झील की हिलोरें नेशनल हाईवे तक पहुंचती थी, अब किनारे पर बड़े-बड़े मार्बल गोदाम एवं इकाइयों के अतिक्रमण से झील छोटी हो गई है। हरियाली बढ़ाने घर-घर पेड़ लगाने एवं पत्थर लगाने की बजाय गार्डन बनाएं। झील को अतिक्रमणों व पॉलीथिन मुक्त बनाएं।