
जावरा। शहर के बीच के रेलवे फाटक की खराबी ने एक महिला की जान ले ली। दोपहर करीब ढाई बजे से बंद फाटक में आम लोगों के वाहनों के साथ ही जननी वाहन और 108 एंबुलेंस भी अटक गए। करीब आधे घंटे तक बंद रही फाटक में अटकी 108 एंबुलेंस में जावरा से रतलाम रैफर की गई महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और रतलाम जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
नागदी निवासी चंदा (३०) पति मंगलबाबा टीबी की मरीज थी और जावरा के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा था। गंभीर स्थिति की वजह से शुक्रवार को उसे रतलाम रैफर किया था। रैफर करने के लिए यहां 108 एंबुलेंस नहीं होने से नामली से एंबुलेंस आई और दोपहर करीब सवा दो बजे अस्पताल से निकलकर ढाई बजे जैसे ही रेलवे फाटक पहुंची यहां फाटक बंद मिला। वाहनों की लंबी कतारों के बीच एंबुलेंस भी अटक गई और इसके पीछे जननी वाहन भी फंसा रहा। एम्बुलेंस के चालक ने बताया कि आधे घंटे बाद करीब २.५५ बजे फाटक खुला तब कहीं जाकर वाहन निकले और रतलाम की तरफ गए। रास्ते में ही महिला की मृत्यु हो गई थी। जिला अस्पताल में डाक्टर ने देखने के बाद मृत घोषित कर दिया।
आधे घंटे में पहुंच सकती थी एंबुलेंस
जावरा से रतलाम की दूरी ३५ किलोमीटर है और एंबुलेंस से यह दूरी २० से २५ मिनट में पूरी हो सकती है, क्योंकि एंबुलेेंस को रास्ता साफ मिलता है। जितने समय एंबुलेंस फाटक पर अटकी रही उतने समय में महिला को जिला अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू किया जा सकता था, किंतु आधे घंटे तक फाटक बंद होने से एंबुलेंस अटकी रही और इतनी देर तक महिला को इलाज नहीं मिल पाया। इस कारण महिला की मौत हो गई।
दिन में कई बार बंद रहा फाटक
शहर के बीच से गुजर रही रेलवे लाइन का यह फाटक दिन में कई बार लंबे समय तक बंद रखा गया। इसमें आई खराबी को दूर करने के लिए कर्मचारी दिनभर लगे रहे। कभी खोलकर फाटक को ले जाते और कभी फिर लाकर लगाते। ऐेसे में इसे कई बार बंद रखना पड़ा। दोपहर में भी जब यहां फाटक पर कर्मचारी काम कर रहे थे। इसी दौरान 108 एंबुलेंस और जननी वाहन फंसे रहे।
Published on:
10 Mar 2018, 9:03 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.