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बच्चों को संस्कारों से रुबरु कराना उद्देश्य बनाए जीवन का

बच्चों को संस्कारों से रुबरु कराना उद्देश्य बनाए जीवन का
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रतलाम

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harinath dwivedi

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Updated: 1 Oct 2018, 5:33 PM IST

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बच्चों को संस्कारों से रुबरु कराना उद्देश्य बनाए जीवन का

बच्चों को ऐसे संस्थानों में नहीं पढ़ाऐं, जहां उनके संस्कार प्रभावित हो, धर्म और संस्कृति से ना किया जाए समझौता.आचार्यश्री

रतलाम। धर्म और संस्कृति से समझौता नहीं जाना चाहिए। बच्चों को ऐसे संस्थानों में नहीं पढ़ाना चाहिए, जहां उनके संस्कार प्रभावित होते है। ऐसे संस्थानों में मोटा डोनेशन देने पर प्रवेश मिलता है और कई शर्तो का पालन करना पड़ता है। डोनेशन लेने के बाद भी संस्थान कभी अपनी शर्तों से समझौता नहीं करते है। यह आव्हान दीक्षा दानेश्वरी आचार्यश्री रामेश ने धर्मावलंबियों से किया।
समता कुंज में रविवार को अमृत देशना देते हुए आचार्यश्री ने कहा कि समाजजन यदि ठान ले कि वे धर्म और संस्कृति से समझौता नहीं करेंगे और ऐसे स्कूलों में बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे, तो कोई संस्थान मनमानी नहीं कर पाएगा। दुनिया में परिवर्तन के चलते यदि समय रहते समाज नहीं चेता, तो आने वाला समय कितना भयानक होगा। इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। आदित्यमुनि ने न्यायालय द्वारा दिए जा रहे फैसलों से समाज में अनैतिक वातावरण बनने की आशंका जताते हुए कहा कि संस्कृति की रक्षा करने का दायित्व हमारा हैए इसके लिए सबकों आवाज उठाना होगी। उन्होंने देश के पूर्व रक्षा मंत्री एवं गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा बीमारी के दौरान लिखे गए पत्र का वाचन भी किया। गौतममुनि ने कहा कि धर्म पर खतरा मंडरा रहा है। एकजुटता से यदि सभी आवाज उठाएंगे, तो न्यायालय को अपने फैसले पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। प्रशममुनि ने भी संबोधित किया। 7 अक्टूबर को वृहद स्तर पर मासक्षमण तपस्वियों के बहुमान कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। संचालन सुशील गौरेचा एवं महेश नाहटा ने किया।

धर्मपाल-सिरिवाल प्रवृत्ति शिविर में सम्मान
समता कुंज में आचार्यश्री की प्रेरणा से धर्मपाल-सिरिवाल प्रवृत्ति शिविर आयोजित किया गया। इसमें व्यसन आदि छोड़कर धर्म के मार्ग पर अग्रसर हुए समाजजनों ने भाग लिया। शिविर में धर्मपाल एवं सिरिवाल बने धर्मावलंबियों को संस्कारित किया गया। शिविर समापन पर शिविरार्थियों का सम्मान किया गया।
शिविर का समापन चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया, श्री संघ के मंत्री सुशील गौरेचा, पवन सियार, राजेश वोरा, महेश नाहटा एवं धर्मपाल प्रचार-प्रसार समिति के राष्ट्रीय संयोजक चित्रेश मेहता, सहसंयोजक चन्द्रशेखर खिंडावते की उपस्थिति में हुआ। शिविर में आदित्यमुनि ने व्यसनों के दुष्परिणाम बताकर धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस दौरान शिविरार्थियों को नमस्कार महामंत्र का जाप कराया गया। शिविर में महिलाए पुरूषों के साथ कई बच्चों ने भी भाग लिया।

अपने दिल-दर्पण में झांककर जीवन उ²ेश्य को प्राप्त करें
संसार के सभी संबंधों में ईश्वरीय आयामों को ध्यान में रखकर अपने दिल दर्पण में झांककर परिपूर्णता प्राप्त करें, जीवन उ²ेश्य को प्राप्त करें और आत्म बोध प्राप्त कर निर्भय, आनंदमय शांतिपूर्ण जीवन यात्रा करें। परम पिता हर पल हर क्षण तुम्हे सत्य ज्ञान देता है, बस हमें उसकी और रूखकर आत्मबोध द्वारा सत्य को उपलब्ध होना है। यह उद्बोधन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में स्थानीय डोंगरे नगर स्थित आश्रम में इंदौर रामबाग से आई ब्रह्माकुमारी छाया दीदी ने व्यक्त किए। आश्रम पर ब्रह्मभोज का आयोजन रखा गया। सेवा केंद्र संचालिक बीके सविता दीदी, गीता दीदी, संगीता दीदी तथा बहनों द्वारा इंदौर से आई चंद्रकला दीदी, अनिता दीदी, विष्णु भाई, मुकेश भाई का स्वागत किया। दीदी के आत्मबोध के बाद परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया तथा सभी भाई-बहनों को ब्रह्मभोज कराया गया। इस अवसर पर जावरा, सैलाना, आलोट, इंदौर, खाचरोद, उज्जैन आदि स्थानों से ७०० के लगभग भाई-बहनों ने आत्मबोध प्राप्त प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर ग्राम विकास विभाग द्वारा मप्र में कृषक सशक्तिकरण अभियान अन्तर्गत सेवाधारी भाई-बहन को पारितोषिक वितरण किया गया।