
रतलाम के कई इलाकों में सुबह से बिजली बंद, नामली से बाजना तक करीब 100 गांवों में ट्रिपिंग और कटौती का सिलसिला जारी, शिकायतों के लिए अधिकारियों के फोन भी नहीं उठे
रतलाम। घरों में दीपों की कतारें सजाने और शहर को रोशनी से जगमगाने की तैयारी के बीच बिजली कंपनी की लचर व्यवस्था ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। जिस दीपोत्सव पर घर-घर रोशनी होनी थी, उसी दिन शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक बिजली आपूर्ति का सिस्टम लड़खड़ा गया। रतलाम शहर के कई इलाकों में सुबह से बिजली गुल रही तो ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। नामली, सरवन, बिलपांक, बिरमावल, जावरा, सैलाना, शिवगढ़, रावटी, बाजना और करमदी सहित करीब 100 गांव बिजली संकट से प्रभावित रहे। हालात यह रहे कि लोग बिजली कंपनी के अधिकारियों से शिकायत करने के लिए फोन लगाते रहे, लेकिन जिम्मेदारों ने फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझा। कांग्रेस नेता राजेश पुरोहित ने कहा है, सनातनी संस्कृति के सबसे बडे़ पर्व पर बिजली गुल कर धार्मिक भावना के साथ कुठाराघात किया जा रहा है।
दीपावली पर घरों, प्रतिष्ठानों और बाजारों में विद्युत सज्जा की जाती है। लोग कई दिन पहले से इसकी तैयारी करते हैं। झालरें, रोशनी की लड़ियां, सजावटी लाइट और अन्य विद्युत उपकरणों से घर-आंगन सजाए जाते हैं। लेकिन बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों की तैयारियों पर पानी फिर गया। शहर के कई क्षेत्रों में सुबह से बिजली नहीं होने के कारण घरेलू कामकाज भी प्रभावित हुए। वहीं, जिन लोगों ने घरों और प्रतिष्ठानों पर आकर्षक विद्युत सज्जा की थी, उन्हें भी बिजली आने का इंतजार करना पड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक परेशान करने वाली रही। नामली, सरवन, बिलपांक, बिरमावल, जावरा, सैलाना, शिवगढ़, रावटी, बाजना और करमदी सहित आसपास के करीब 100 गांवों में बिजली आपूर्ति नियमित नहीं रही। कहीं बिजली लंबे समय तक बंद रही तो कहीं कुछ देर के अंतराल में बार-बार बिजली गुल होती रही। इससे ग्रामीण उपभोक्ता परेशान होते रहे। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर भी निर्बाध बिजली नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी रही।
बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या शिकायत दर्ज कराने की रही। लोग बिजली कंपनी के अधिकारियों को लगातार फोन लगाते रहे, लेकिन अधिकारियों ने कॉल रिसीव नहीं किए। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह तक पता नहीं चल पाया कि बिजली कब तक बहाल होगी और आपूर्ति बार-बार क्यों बाधित हो रही है। त्योहार के दिन बिजली कंपनी की यह कार्यप्रणाली उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ाने वाली रही।
दीपावली पर बिजली की जरूरत सामान्य दिनों से अधिक रहती है। घरों में पूजन, पकवान बनाने, मेहमानों की आवाजाही और प्रतिष्ठानों में ग्राहकी के दौरान बिजली की निर्बाध आपूर्ति जरूरी होती है। इसके बावजूद शहर से लेकर गांव तक बिजली व्यवस्था का लड़खड़ाना कंपनी की तैयारियों और निगरानी पर सवाल खड़े करता है। त्योहार के मद्देनजर बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और वितरण व्यवस्था की पूर्व तैयारी की जिम्मेदारी बिजली कंपनी की थी। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को कटौती और ट्रिपिंग का सामना करना पड़ा। दीपोत्सव पर जब हर घर को रोशनी से जगमग होना था, तब शहर और ग्रामीण अंचल के कई उपभोक्ता बिजली का इंतजार करते रहे।
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
Updated on:
7 Nov 2026, 6:48 PM IST
Published on:
7 Nov 2026, 6:47 PM IST
बड़ी खबरें
View Allरतलाम
मध्य प्रदेश न्यूज़




