गुर्जर समाज युवा इकाई अध्यक्ष मुरलीधर गुर्जर ने कहा कि परंपरा के अनुसार देवस्थानों की साफ-सफाई कर धूप, नैवेद्य, मिठाई और पकवानों का भोग लगाया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर पितरों का स्मरण करते हैं। इस परंपरा का विशेष आकर्षण घर की छत पर गोबर से बनाई जाने वाली तलाई है। इसमें दूध, दही और घी डालकर दीपक प्रज्वलित किया जाता है।