रतलाम। दीपोत्सव केवल दीपों की रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं को आत्मसात करने का अवसर भी है। पांच दिवसीय दीपोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को रूप चौदस पर आलोट नगर में इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली। कहीं ब्रह्ममुहूर्त में अभ्यंग स्नान कर शरीर और मन की शुद्धि का संकल्प लिया गया तो कहीं उबटन, तेल मालिश और पारंपरिक स्नान की रस्मों के बीच रूप निखारने की तैयारी हुई। घरों में पूजा-अर्चना, दीप प्रज्ज्वलन और सजावट का क्रम चलता रहा। छोटी दीपावली के अवसर पर पूरा नगर उत्सवी उल्लास और धार्मिक श्रद्धा से सराबोर नजर आया।