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रतलाम में अभ्यंग स्नान से निखरा रूप, दीपों की आभा से दमका आलोट

रूप चौदस पर घर-घर निभाई गई धार्मिक परंपरा, भगवान श्रीकृष्ण के नरकासुर वध की स्मृति में मनाया नरक चतुर्दशी पर्व; ब्यूटी पार्लरों में भी उमड़ी महिलाओं और युवतियों की भीड़
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रतलाम

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Ashish Pathak

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Updated: 7 Nov 2026, 7:57 PM IST

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रूप चौदस पर घर-घर निभाई गई धार्मिक परंपरा

रतलाम। दीपोत्सव केवल दीपों की रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं को आत्मसात करने का अवसर भी है। पांच दिवसीय दीपोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को रूप चौदस पर आलोट नगर में इसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली। कहीं ब्रह्ममुहूर्त में अभ्यंग स्नान कर शरीर और मन की शुद्धि का संकल्प लिया गया तो कहीं उबटन, तेल मालिश और पारंपरिक स्नान की रस्मों के बीच रूप निखारने की तैयारी हुई। घरों में पूजा-अर्चना, दीप प्रज्ज्वलन और सजावट का क्रम चलता रहा। छोटी दीपावली के अवसर पर पूरा नगर उत्सवी उल्लास और धार्मिक श्रद्धा से सराबोर नजर आया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रूप चौदस को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से स्नान करने से व्यक्ति को रूप, आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध कर हजारों कन्याओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराने की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने और जीवन में सकारात्मकता का संचार करने का संदेश भी देता है।

अभ्यंग स्नान से निभाई सदियों पुरानी परंपरा

रूप चौदस पर सुबह से ही घरों में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन शुरू हो गया था। महिलाओं ने सूर्योदय से पहले तेल से मालिश कर उबटन लगाया और फिर पारंपरिक तरीके से अभ्यंग स्नान किया। इस परंपरा को केवल सौंदर्य से जोड़कर नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक शुद्धता तथा आरोग्य से भी जोड़कर देखा जाता है। परिवार के सदस्यों ने भी पर्व की मान्यताओं के अनुसार स्नान किया। घरों में सुबह से ही चहल-पहल रही और दीपावली के स्वागत की तैयारियां भी साथ-साथ चलती रहीं।

रूप निखारने ब्यूटी पार्लरों में लगी रही कतार

पर्व पर महिलाओं और युवतियों में सजने-संवरने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। दीपावली पर सुंदर और आकर्षक दिखने की चाह में सुबह से ही ब्यूटी पार्लरों में ग्राहकों की आवाजाही शुरू हो गई थी। फेशियल, क्लीनअप और अन्य सौंदर्य सेवाओं के लिए महिलाएं और युवतियां पार्लरों में पहुंचीं। दिनभर पार्लर संचालक भी व्यस्त रहे। पारंपरिक अभ्यंग स्नान के साथ आधुनिक सौंदर्य सज्जा का यह मेल पर्व की रौनक को और बढ़ाता नजर आया।

दीपों और रंगोली से सजे घर-आंगन

रूप चौदस पर केवल शारीरिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि घर-आंगन को सजाने की परंपरा भी उत्साह के साथ निभाई गई। महिलाओं ने घरों के मुख्य द्वार पर आकर्षक रंगोली सजाई। दीपों की सजावट के लिए तैयारियां की गईं और पूजा स्थलों को भी विशेष रूप से संवारा गया। शाम को दीप प्रज्ज्वलन के साथ घरों में सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की गई। रूप चौदस के साथ ही दीपोत्सव की रौनक अपने चरम की ओर बढ़ने लगी है। नरकासुर वध की धार्मिक स्मृति, अभ्यंग स्नान की प्राचीन परंपरा और दीपों से सजे घर-आंगन ने आलोट में छोटी दीपावली को आस्था और उल्लास का पर्व बना दिया। अब नगरवासी मां लक्ष्मी के स्वागत और दीपावली के महापर्व की प्रतीक्षा में जुट गए हैं।