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हनुमानजी के ये रहस्य कर देंगे आपको हैरान : जानिये किन बाधाओं से बचाते हैं बजरंगबली…

ये हैं बजरंगबली की सबसे ऊंची प्रतिमाएं...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

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Updated: 19 May 2020, 6:04 AM IST

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भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार हनुमान इस कलियुग में सबसे ज्यादा जाग्रत और साक्षात देव हैं। कलियुग में हनुमानजी की भक्ति ही लोगों को दुख और संकट से बचाने में सक्षम है। बहुत से लोग किसी बाबा, देवी-देवता, ज्योतिष और तांत्रिकों के चक्कर में भटकते रहते हैं और अंतत: वे अपना जीवन नष्ट ही कर लेते हैं... क्योंकि वे हनुमान की भक्ति-शक्ति को नहीं पहचानते। पर क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी हमें किन किन समस्याओं से किस तरह से बचाते हैं...

हनुमान जी : इन बाधाओं से बचाते हैं ...
> भूत-पिशाच : भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥ अर्थ : जहां महावीर हनुमानजी का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच पास भी नहीं फटक सकते। जिसे किसी अनजान शक्ति या भूत पिशाच आदि से डर लगता है वे हनुमानजी का बस नाम ही जपते रहेंगे तो भय‍मुक्त हो जाएंगे।

भूत-पिशाच जैसी ऊपरी बाधाओं से परेशान व्यक्ति को बजरंगबाण का पाठ करना चाहिए और नित्य या मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी को अगरबत्ती लगाना चाहिए।

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फैक्ट्री या व्यवसाय-स्थान आदि पर भूत-प्रेतों का साया न पड़े, इसके लिए अपने-अपने प्रतिष्ठानों के ऊपर हनुमान ध्वज (झंडा) लगाना चाहिए। यह ध्वज लाल कलर का हो। बुरी आत्माओं का प्रवेश घर में न हो, इसके लिए द्वार पर सिंदूर से राम-राम लिखकर 7 बिंदु लगा दे जिससे आपका घर सुरक्षित रहेगा। मकान के आसपास शमशान हो या कोई खंडहर भवन हो तो ऐसे में मकान के ऊपर हनुमत-ध्वज की स्थापना कर देनी चाहिए।

> भयमु‍क्त जीवन : यदि आप अंधेरे, भूत-प्रेत से डरते हैं या किसी भी प्रकार का भय है तो आप 'हं हनुमंते नम:' का रात को सोने से पूर्व हाथ-पैर और कान-नाक धोकर पूर्वाभिमुख होकर 108 बार जप करके सो जाएं। कुछ ही दिनों में धीरे-धीरे आपमें निर्भीकता का संचार होने लगेगा।

- शनि और ग्रह बाधा : जिसे लगाता है कि उसको शनि या अन्य किसी ग्रह की बाधा है, साढ़े साती, अढ़ाय्या या राहु की महादशा चल रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं। जिन पर हनुमानजी की जिस पर कृपा होती है, उसका शनि और यमराज भी बाल बांका नहीं कर सकते।


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आप प्रति मंगलवार हनुमान मंदिर जाएं और शराब व मांस के सेवन से दूर रहें। इसके अलावा शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा पाठ करने से शनि भगवान आपको लाभ देने लगेंगे। शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी को आटे के दीपक लगाएं।

कारण : चंद्रमा को हनुमानजी ने शनि से बचाया था तो वे चंद्रशेखर कहलाए थे। एक बार रामजप में बाधा डालने के बारण शनिदेव को हनुमानजी ने अपनी पूंछ में लपेट लिया था और अपना रामकार्य करने लग गए थे। इस दौरान शनिदेव को कई चोटे आई। बाद में जब हनुमानजी को याद आया तो उन्होंने शनिदेव को मुक्त किया।

तब शनिदनेव को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने कहा कि आज के बाद में रामकार्य और आपके भक्तों भक्तों के कार्य में कोई बाधा नहीं डालूंगा। एक बार हनुनामजनी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था तब शनि भगवान ने वचन दिया था कि मैं आपके किसी भी भक्त पर अपनी कृपा बनाए रखूंगा।

> रोग और शोक : नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥ अर्थ : वीर हनुमानजी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते हैं और सब पीड़ा मिट जाती है। यदि आपको शरीर में पीड़ा है या आप किसी रोग से ग्रस्त हैं तो आप हनुमान बहुक का पाठ करें।

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हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित स्त्रोत है। जनश्रुति के अनुसार एकबार जब कलियुग के प्रकोप से उनकी भुजा में अत्यंत पीड़ा हुई तो उसके निवारण के लिये तुलसीदास जी ने इस स्त्रोत की रचना की।

यदि आप गठिया, वात, सिरदर्द, कंठ रोग, जोड़ों का दर्द आदि तरह के दर्द से परेशान हैं, तो जल का एक पात्र सामने रखकर हनुमान बाहुक का 26 या 21 दिनों तक मुहूर्त देखकर पाठ करें। प्रतिदिन उस जल को पीकर दूसरे दिन दूसरा जल रखें। हनुमानजी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ाओं से आपको मुक्ति मिल जाएगी।


> कोर्ट-कचहरी-जेल बंधन से मुक्ति : हनुमानजी 'बंधी छोड़' बाबा है। उनके अलावा कोई अन्य बंदी छोड़ नहीं है। जो व्यक्ति नित्य सुबह और शाम हनुमान चालीसा पढ़ता रहता है उसे कोई भी व्यक्ति बंधक नहीं बना सकता। उस पर कारागार का संकट कभी नहीं आता। वह मानसिक रूप से भी बंधन से मुक्त हो जाता है।


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यदि किसी व्यक्ति को अपने कुकर्मों के कारण कारागार (जेल) हो गई है, तो उसे संकल्प लेकर क्षमा-प्रार्थना करना चाहिए और आगे से कभी किसी भी प्रकार के कुकर्म नहीं करने का वचन देते हुए हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें। हनुमानजी की कृपा हुई तो कारागार से ऐसे व्यक्ति मुक्त हो जाते हैं।

इसके अलावा यदि आपका कोई केस कोर्ट में चल रहा है तो भी आप जीत जाएंगे। प्रति मंगलवार एवं शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर गुड़ और चना अर्पित करें और घर में सुबह-शाम हनुमान चालीसा का पाठ करें। पाठ करने के पहले और बाद में आधे घंटे तक किसी से बात न करें। जब 21 दिन पूरे हो जाएं तो हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। हनुमान जी की कृपा हुई तो आप निश्‍चित ही कोर्ट से बरी हो जाएंगे।

> मारण-सम्मोहन-उच्चाटन : बहुत से व्यक्ति अपने कार्य या व्यवहार से लोगों को रुष्ट कर देते हैं, इससे उनके शत्रु बढ़ जाते हैं। कुछ लोगों को स्पष्ट बोलने की आदत होती है जिसके कारण उनके गुप्त शत्रु भी होते हैं। यह भी हो सकता है कि आप सभी तरह से अच्छे हैं फिर भी आपकी तरक्की से लोग जलते हो और आपके विरुद्ध षड्‍यंत्र रचते हो।

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ऐसे समय में यदि आप सच्चे हैं तो श्रीबजरंग बाण आपको बचाता है और शत्रुओं को दंड देता है। बजरंग बाण से शत्रु को उसके किए की सजा मिल जाती है, लेकिन इसका पाठ एक जगह बैठकर अनुष्ठानपूर्वक 21 दिन तक करना चाहिए और हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि हनुमानजी सिर्फ सच्चे और पवित्र लोगों का ही साथ देते हैं। 21 दिन में तुरंत फल मिलता है।

> घटना-दुर्घटना से बचना : घटना-दुर्घटना को राहु-केतु और शनि अंजाम देते हैं। जैसे अचानक आग लग जाना, आपकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता या किसी मुसिबत का अचानक आ जाना।
हनुमानजी आपको सभी तरह की घटना और दुर्घटना से बचा लेते हैं। इसके लिए आप सदा उनकी शरण में रहकर प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ते रहे। कभी कभी सुंदरकांड भी पढ़े और बजरंग बाण भी। इसके अलावा साबर मंत्रों को भी ज्ञान प्राप्त कर लें।

हनुमान जी का शाबर मंत्र अत्यंत ही सिद्ध मंत्र है। इसके प्रयोग से हनुमानजी तुरंत ही आपके मन की बात सुन लेते हैं। यह मंत्र आपके जीवन के सभी संकटों और कष्टों को तुरंत ही चमत्कारिक रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है। हनुमानजी के कई शाबर मंत्र हैं तथा अलग-अलग कार्यों के लिए हैं।

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> मंगल दोष : बहुत से लोग मंगलदोष के भय से ग्रसित हैं। शादी के लिए मंगल को जिन स्‍थानों पर देखा जाता है वे 1,4,7,8 और 12 भाव हैं। ज्योतिषियों अनुसार इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव सामान्‍य तौर पर खराब माना जाता है। सामान्‍य तौर का अर्थ है कि विशेष परिस्थितियों में इन स्‍थानों पर बैठा मंगल भी अच्‍छे परिणाम दे सकता है। ऐसा माना जाता है कि 28 वर्ष की उम्र के बाद यह दोष समाप्त होना शुरू हो जाता है।

मंगलवार के दिन व्रत रखकर सिंदूर से हनुमानजी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है। इसके अलावा लाल वस्त्र में मसूर दाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, मिष्टान एवं द्रव्य लपेट कर नदी में प्रवाहित करने से मंगल का अमंगल दूर होता है।

> कर्ज से मुक्ति : यदि किसी कारणवश आप कर्ज में डूब गए हैं या कर्ज से परेशान हैं तो हनुमान भक्ति से कर्ज से छुटकारा पा सकते हैं। कर्ज से मुक्त होना आसान नहीं लेकिन कठिन भी नहीं। हनुमानजी की कृपा हुई तो तुरंत ही इससे मुक्त हो जाएंगे। मंगलवार का दिन हनुमानजी का माना जाता है।

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यह दिन कर्ज से मुक्ति के लिए सबसे उत्तम है। यदि किसी से कर्ज लिया है तो उसे मंगलवार के दिन चुकाने के बारे में सोचे। बुधवार और रविवार को कभी किसी को उधार न दें। मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करके हनुमान मंदिर में नारियल रखना अच्छा माना जाता है।

: मंगलवार को इन चीजों के प्रयोग व दान का विशेष महत्व है- तांबा, मतान्तर से सोना, केसर, कस्तूरी, गेहूं, लाल चंदन, लाल गुलाब, सिन्दूर, शहद, लाल पुष्प, शेर, मृगछाला, मसूर की दाल, लाल कनेर, लाल मिर्च, लाल पत्थर, लाल मूंगा।

: आटे के बने दीपक को बढ़ के पत्ते पर रखकर जलाएं। ऐसे पांच पत्तों पर पांच दीपक रखें और उसे ले जाकर हनुमानजी के मंदिर में रख दें। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें।

: शुक्लपक्ष के किसी मंगलवार की रात को हनुमानजी के मंदिर में दो दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें। पहला देसी घी का छोटा दीपक लगाएं। दूसरा 9 बत्तियों वाला एक बड़ा दीप लगाएं जिसमें सरसों का तेल हो और दो लोंग डाली गई हो और जो रातभर जलता रहे। छोटा दीपक आपके दाहिनी ओर रहेगा और बड़ा दीपक हनुमानजी के सामने। ऐसा आप पांच मंगलवार करें।


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> नौकरी और रोजगार : आप बेरोजगार है या आपका व्यापार नहीं चल रहा है तो आप मंदिर में मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करें। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और प्रति मंगालवार को हनुमानजी के मंदिर जाएं। हो सके तो पांच शनिवार को हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। यदि यह संभाव नहीं हो तो पांच बार कभी भी किसी भी शनिवार को चोला चढ़ाएं।

आप अपने संस्थान में एक लाल कपड़े में नारिलय को नाड़े से बंधकर एक ओर लटका दें। दूसर यदि आप नौकरी पाना चाहते हैं तो नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं, तो जेब में लाल रूमाल या कोई लाल कपड़ा रखें। संभव हो, तो शर्ट भी लाल पहनें। आप जितना अधिक लाल रंग का प्रयोग कर सकते हैं, करें। लेकिन यह याद रखें कि लाल रंग भड़कीला ना लगे सौम्य लगे।

> तनाव या चिंता : बहुत से लोगों को अनावश्यक भय और चिंता सताती रहती है जिसके कारण वे तनाव में रहने लगते हैं। तनाव में रहने की आदत भी हो जाती है जिसके चलते व्यक्ति कई तरह के रोग से भी घिर सकता है।

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ऐसे व्यक्ति को मन ही मन हनुमानजी के मंत्र 'ॐ हनुमते नम:' या 'ॐ हनुमंते नम:' का जप करते रहना चाहिए। रात में सोते समय उसे 108 बार इस मंत्र का जप करके सो जाना चाहिए और सुबह उठकर नित्यकर्म से निपटने के बाद एक आसन पर बैठकर इस मंत्र का जप करना चाहिए। धीरे-धीरे भय, चिंता, तनाव और आशंका मिटने लगेंगे।

बजरंग बली की प्रमुख सबसे ऊंची प्रतिमाएं :
वहीं देश में हनुमान जी के भक्तों द्वारा उनकी कई मूर्तियों का निर्माण कराया गया है, जिनमें से प्रमुख 10 मुर्तियां इस प्रकार हैं...

1. वीर अभय अंजनी हनुमान स्वामी
यह भगवान हनुमान को समर्पित दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा है। यह भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में विजयवाड़ा शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर NH-9 पर परितला गाँव में स्थित है। यह मूर्ति वर्ष 2003 में स्थापित की गई थी। इसकी ऊंचाई 135 फीट (करीब 41 मीटर) है। यह प्रतिमा ब्राजील के रियो डी जेनेरियो स्थित 'क्राइस्ट द रिडीमर' स्टैच्यू से भी ऊंची है। हर रोज हजारों श्रद्धालु परितला गाँव में इसके दर्शन करने पहुंचते हैं।


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2.दमनजोड़ी की हनुमान प्रतिमा
ओड़िशा राज्य में कोरापुट के दमनजोड़ी में स्थित यह प्रतिमा दूसरी सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा है। इसकी ऊंचाई 108 फीट से भी ज्यादा है। वर्ष 2017 में 3 मार्च को इस प्रतिमा का उद्घाटन हुआ।

3. शिमला की हनुमान प्रतिमा
हिमाचल प्रदेश में शिमला स्थित महावीर हनुमान की प्रतिमा 108 फीट ऊंची है। वर्ष 2010 में इसका लोकार्पण किया गया। इसे बनाने में 1.9 करोड़ रुपए की लागत आई। शिमला में यह जाखू पहाड़ी पर समुद्र तल से 8048 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। हनुमान जी का जाखू मंदिर, बर्फीली चोटियों, घाटियों और शिमला शहर का सुंदर और मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। भगवान हनुमान को समर्पित यह धार्मिक केंद्र रिज के निकट स्थित है। यहां एक हिल स्टेशन भी है।

4. महाराष्ट्र की हनुमान मूर्ति
महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में नन्दुरा नाम के छोटे से इलाके में हनुमान जी की 105 फीट ऊंची प्रतिमा है। यह नेशनल हाई-वे नं. 6 के पास ही स्थित है, जिसकी वजह से इसे वहां से भी आसानी से देखा जा सकता है। नन्दुरा इलाके का यह एक मात्र दर्शनीय स्थल है।


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5. हनुमत धाम प्रतिमा शाहजहांपुर
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में भगवान हनुमान की 104 फीट ऊंची प्रतिमा स्थित है। यह विश्राम घाट में है, जिसे हनुमत धाम कहा जाता है। वर्ष 2013 में इसका लोकार्पण किया गया।

6. अगारा हनुमान प्रतिमा, कर्नाटक
कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु की पंचायत में 102 फीट ऊंची अगारा प्रतिमा स्थित है, जो बेंगलुरु में किसी भी देवता की सबसे ऊँची मूर्ति है। वर्ष 2012 में इसका उद्घाटन हुआ।


7. छिंदवाड़ा की हनुमान प्रतिमा
मध्‍य प्रदेश में छिंदवाड़ा शहर से 15 किमी दूर स्थित सिमरिया में भगवान हनुमान की यह प्रतिमा स्थापित है। इस हनुमान प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 101 फीट की है। यहां पर भगवान हनुमान के अलावा भगवान शिव समेत कई देवी देवताओं की मूर्तियां भी हैं।

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8.अबिराजुपालम हनुमान प्रतिमा
आंध्र प्रदेश के डोड्डीपटला में हनुमान जी की अबिराजुपालम प्रतिमा स्थित है। यह 98 फीट उूंची प्रतिमा है। वर्ष 2013 में अप्रैल में इसका लोकार्पण किया गया।

9. राम तीर्थ हनुमान, अमृतसर
पंजाब के अमृतसर में महावीर हनुमान की 75 फीट ऊंची प्रतिमा मौजूद है। रामघाट स्थित यह प्रतिमा, श्री राम तीरथ मंदिर में लोपोक रोड पर अमृतसर से 11 किलोमीटर दूर है।


10. दिल्ली में झंडेवालान की हनुमान प्रतिमा
देश की राजधानी दिल्ली में झंडेवालान क्षेत्र में करोल बाग मेट्रो स्टेशन के पास यह प्रतिमा 60 फीट से ज्यादा उूंची है। झंडेवालान स्थित हनुमान मंदिर दिल्ली के सबसे लोकप्रिय हिंदू मंदिरों में से एक है।

हनुमान जी ऐसे होते हैं प्रसन्न :
हनुमानजी बहुत ही जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। उनकी कृपा आप पर निरंतर बनी रहे इसके लिए पहली शर्त यह है कि आप मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें अर्थात कभी भी झूठ न बोलें, किसी भी प्रकार का नशा न करें, मांस न खाएं और अपने परिवार के सदस्यों से प्रेमपूर्ण संबंध बनाए रखें। इसके अलावा प्रतिदिन श्रीहनुमान चालीसा या श्रीहनुमान वडवानल स्तोत्र का पाठ करें। मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाएं।

ये हैं खास उपाय...
हनुमान जयंती या महीने के किसी भी मंगलवार के दिन सुबह उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनें। 1 लोटा जल लेकर हनुमानजी के मंदिर में जाएं और उस जल से हनुमानजी की मूर्ति को स्नान कराएं।

पहले दिन एक दाना साबुत उड़द का हनुमानजी के सिर पर रखकर 11 परिक्रमा करें और मन ही मन अपनी मनोकामना हनुमानजी को कहें, फिर वह उड़द का दाना लेकर घर लौट आएं तथा उसे अलग रख दें।

दूसरे दिन से 1-1 उड़द का दाना रोज बढ़ाते रहें तथा लगातार यही प्रक्रिया करते रहें। 41 दिन 41 दाने रखने के बाद 42वें दिन से 1-1 दाना कम करते रहें। जैसे 42वें दिन 40, 43वें दिन 39 और 81वें दिन 1 दाना। 81वें दिन का यह अनुष्ठान पूर्ण होने पर उसी दिन, रात में श्रीहनुमानजी स्वप्न में दर्शन देकर साधक को मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं। इस पूरी विधि के दौरान जितने भी उड़द के दाने आपने हनुमानजी को चढ़ाए हैं, उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें।