24 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूल खुलने में सात दिन शेष, अभी तक नहीं पहुंची किताबें

साढ़े तीन लाख बच्चों का भविष्य संकट में, 130 स्कूलों में पहुंचाना है किताबें

2 min read
Google source verification
Seven days left till the school opens, not yet reached the books

Seven days left till the school opens, not yet reached the books

रीवा. जिले के हाई स्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ शिक्षा विभाग घोर लापरवाही बरत रहा है। राज्य पाठ्य पुस्तक निगम से साढ़े तीन लाख छात्र-छात्राओं के लिए किताबें आ तो गई हैं लेकिन स्कूल तक अभी नहीं पहुंची हैं। जबकि 15 जून से स्कूल खुलने हैं और क्लासें शुरू होनी हैं।


मालूम हो कि इस बार शिक्षा विभाग ने नया शिक्षा सत्र अप्रैल महीने से शुरू किया था। उसी वक्त छात्र-छात्राओं को किताबें वितरित की जानी थी। सूत्रों की माने विभागीय अधिकारियों ने कुछ छात्र-छात्राओं को पुरानी किताबों का वितरण कर अप्रैल उत्सव मना लिया था। अप्रैल महीने में अधिकांश छात्र-छात्राएं बिना किताबों के ही स्कूल गए थे। स्थिति ये रही कि पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को बाजार से किताबें खरीदनी पड़ीं तो कइयों ने पुराने छात्रों से लेकर जैसे-तैसे पढ़ाई की। किताब वितरण में हो रही देरी का कारण बताया जा रहा है कि एनसीईआरटी की किताबें आनी थी। राज्य पाठ्य पुस्तक की ओर से समय पर छपाई नहीं हो सकी थी। मालूम हो कि जिले में 120 हाई स्कूल, 130 हायर सेकंडरी स्कूल और 3700 प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय हैं।


कैसे होगी बेहतर पढ़ाई
छात्र-छात्राओं के साथ अभिभावकों को भी चिंता सताने लगी है। जिनके पास किताबें नहीं है। राज्य पाठ्य पुस्तक निगम की किताबों के वितरण का इंतजार कर रहे हैं वे छात्र-छात्राएं एक बार फिर बिना किताबों के स्कूल पहुंचेंगे। साढ़े तीन लाख बच्चों का भविष्य संकट में है। 130 स्कूलों में किताबें पहुंचाना है जो समय से नहीं पहुंच पाएंगी। लेकिन शिक्षा विभाग का रवैया रीवा जिलेे में लापरवाहीपूर्ण है। महज आठ दिन बचे हैं। 15 जून से स्कूल शुरू हो रहा है। ऐसे में बिन किताब कैसे बेहतर शिक्षा की परिकल्पना की जा सकती है।


------------------
किताबें आ गई हैं। विकास खंडों को वितरित की जा रही हैं। स्कूल खुलने तक किताबों का वितरण सुनिश्चित कर लिया जाएगा।
केपी तिवारी, जिला परियोजना समंवयक, जिला शिक्षा केंद्र रीवा।