
EXCLUSIVE: बचपन की इस बड़ी गलती की वजह से युवा नहीं जा पा रहे सेना में
Shivmani Tyagi@Patrika.com
सहारनपुर। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके बच्चे का भविष्य उज्जवल हो और वह शारीरिक रूप से सेना समेत अन्य भर्तियों में शामिल हो सके तो बचपन से ही इसकी तैयारी बच्चों को करनी होगी। कारण, बचपन में बच्चों को पर्याप्त डाइट ना मिलने की वजह से अगर वह कुपोषण का शिकार हो गए तो फिर जवानी में कितनी भी दौड़ लगाये, कितने भी जिम कर लें और कितनी भी कसरत कर लें लेकिन सेना के लिए शारीरिक रूप से मजबूत नहीं हो पाएंगे।
यह खुलासा सहारनपुर में चल रही सेना भर्ती रैली में हुआ है। यहां कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें अभ्यर्थियों ने दौड़ भी समय से पूरी कर ली, बीम मारने में भी यह युवा अव्वल निकले और लंबाई चौड़ाई में फिट आए। बावजूद इसके मेडिकल में इनके अरमानों पर पानी फिर गया। इनमें से कुछ को परमानेंट डिसएबल कर दिया गया है तो कुछ को टेंपरेरी रूप से डिसएबल किया गया है।
आप सोच रहे होंगे कि जब उन्होंने शारीरिक दक्षता की सारी परीक्षाएं पार कर ली तो फिर इन्हें के बाहर क्यों निकाला गया। इसका जवाब जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल, मेडिकल में जितने युवाओं को बाहर का रास्ता देखना पड़ रहा है उनमें से अधिकांश का बचपन कमजोर रहा है। बचपन में पर्याप्त डाइट नहीं मिली या फिर कुपोषण का शिकार हो गए। यह कुपोषण उनकी हड्डियों में समा गया।
बचपन मे कुपोषण का शिकार हुए इन युवाओं ने जवानी में खूब मेहनत करके खुद को शारीरिक रूप से मजबूत तो कर लिया लेकिन बेस कमजोर होने की वजह से जवानी में भी कुपोषण के लक्षण और खामियां शरीर मे रह गई और इसी कारण अब इन्हें मेडिकल परीक्षा से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है।
बचपन से करें बच्चों की देखभाल
अगर आप भी अपने बच्चों को सेना में भेजना चाहते हैं तो इसकी तैयारी बचपन से ही करनी होगी। आपको बचपन से ही बच्चों की डाइट और उनके स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देना होगा। बचपन में बच्चों को पर्याप्त डाइट ना मिलने की वजह से निमोनिया जैसे गंभीर रोग हो जाते हैं। ऐसे लोगों का जीवन भर दंश झेलना पड़ता है। अगर आपने अपने बच्चों का बचपन से ही ख्याल नहीं किया तो ऐसा हो सकता है कि आप की यह लापरवाही जवानी में उनके अरमानों पर पानी फेर दे। सहारनपुर में चल रहे सेना भर्ती मेले में ऐसे काफी नौजवान पहुंच रहे हैं।
जिन्होंने शारीरिक परीक्षा पास की और इनकी आंखों में देश की सेवा करने का जज्बा चमक उठा। बावजूद इसके दिल के अरमानों पर पानी फिर गया और बचपन में हुई गलती के कारण इन्हें सेना से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सेना भर्ती मेले दिन मेडिकल ऑफिसर का यही कहना है कि जिन बच्चों की बचपन की डाइट कमजोर है या जो बचपन में किसी भी तरह से कुपोषण का शिकार हो गए थे उन्हें सेना में नहीं लिया जाता और ऐसी बच्चे शारीरिक रूप से दिखने में तो स्वस्थ हो सकते हैं लेकिन वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं होते। मेडिकल ऑफिस का कहना है कि कई अभियार्थियों में कलर विजन, कानों का मैल, दांतों में नुकसान आदि के चलते टेंपरेरी डिसएबिलिटी जैसे लक्षण पाए गए हैं। वहीं कई अभियार्थियों में कुपोषण के चलते शारिरिक बनावट, कमजोर हड्डियां, शरीर का पूरा विकास नहीं होना जैसे परमानेंट डिसएबिलिटी मिली हैं।
मेडिकल में बाहर हो रहे कुल अभ्यर्थियों में से ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या करीब 40% है। जो बचपन की गलती की वजह से मेडिकल से आउट किए जा रहे हैं। यह सभी वह अभ्यर्थी हैं जिनकी बचपन में डाइट कमजोर रह गई। बचपन में ये कुपोषण का शिकार हो गए या निमोनिया जैसी बीमारियों ने उन्हें घेर लिया था। मेडिकल ऑफिसर मेजर मिथुन नारायण ने इसकी पुष्टि की है और उन्होंने बताया कि ऐसे अधिकांश अभ्यर्थियों को परमानेंट डिसएबल कर दिया जाता है लेकिन कुछ को टेंपरेरी डिसएबल भी किया गया है। जिनका दोबारा से मेडिकल होगा।
Published on:
13 Oct 2018 02:25 pm
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