वहीं उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि दूसरी तरफ सरकारें महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करती हैं और तीन तलाक के मुद्दों पर चुनाव लड़ने की बात करती हैं। जब चुनाव का टाइम होता है तब मुसलमान औरतों की याद आती है, ताकि इनके आधार पर चुनाव लड़ सके, लेकिन उनकी समस्याओं को सुनने के लिए इनके पास वक्त नहीं है। बार-बार मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की गई, ताकि तीन तलाक का दंश झेल रही महिलाओं का पक्ष उनको बताया जा सके। लेकिन, आज तक मुख्यमंत्री के पास वक्त नहीं है कि वह महिलाओं से मुलाकात करके उनकी समस्या दूर कर सकें। दारुल उलूम देवबंद दहशतगर्दी फैलाने का काम नहीं करता है, ऐसा इनके मौलानाओं का कहना है, लेकिन ये दहशतगर्दी नहीं है तो क्या है? उन्होंने समाज में एक भय पैदा कर रखा है, ताकि लोग अपने घरों दुबके रहे और इनके आगे बोलने की हिम्मत न कर सकें।