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270 शस्त्र लाइसेंसों में जालसाजी, पीएचक्यू ने दिए मुकदमा दर्ज करने के निर्देश

प्रदेश का सबसे बड़ा शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़ा सतना मेंसतना में नियम कायदे दरकिनार कर शस्त्र शाखा से जारी होते रहे लाइसेंससूची में जनप्रतिनिधि सहित कई रसूखदारों के लाइसेंस भी शामिल  
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सतना

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Ramashankar Sharma

•

Updated: 5 Feb 2020, 12:51 AM IST

State's largest arms license fraud in Satna

State's largest arms license fraud in Satna

सतना. जिले में हुए शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े की जांच में एसटीएफ भोपाल को लगभग 110 शस्त्र लाइसेंसों में गड़बड़ी मिली है। लाइसेंस फर्जीवाड़े की सूची में कई सफेदपोशों के नाम भी शामिल हैं। पीएचक्यू (पुलिस मुख्यालय) ने इसे प्रदेश का सबसे बड़ा शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़ा माना है। मामले में एसटीएफ को आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। प्राथमिक जांच में एसटीएफ जबलपुर ने 270 के लगभग लाइसेंसों में गड़बड़ी पाई थी।

जिले की शस्त्र लाइसेंस शाखा से 2013-14 में 300 शस्त्र लाइसेंस नियमों को ताक पर रख कर जारी किए गए थे। जम्मू कश्मीर, नागालैण्ड, असम के लाइसेंस फर्जी तरीके से जिले में दर्ज कर लिए गए थे। लाइसेंस जारी हुए बिना ही लाइसेंस की सीमा वृद्धि भी कर दी जाती थी। लाइसेंसों पर मनमानी तरीके से कारतूस बढ़ाए जाते रहे। यह सब डीएम और एसडीएम के हस्ताक्षर की आड़ में किया जाता रहा। पत्रिका ने इस फर्जीवाड़े को उठाया। 2013-14 में तत्कालीन कलेक्टर की जांच में मामला खुला भी पर उसके बाद के कलेक्टरों ने चुप्पी साधे रखी। समय बीतने के साथ ही मामला नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के संज्ञान में आया तो प्रदेशभर की एजेंसियां सक्रिय हुईं। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने जांच एसटीएफ को हस्तांतरित की थी।
बिना एनओसी अन्य प्रांत के लाइसेंस जिले में दर्ज
पुलिस महानिदेशक के आदेश के बाद एसटीएफ भोपाल ने शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े की जांच शुरू की। अब तक की जांच में 110 के लगभग लाइसेंसों में गड़बड़ी मिली है। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा अन्य राज्यों के शस्त्र लाइसेसों को बिना पुलिस महानिरीक्षक अपराध अनुसंधान ब्यूरो भोपाल की एनओसी के जिले में दर्ज करने का सामने आया है। इसके तहत डीमापुर नागालैण्ड, राजौरी, श्रीनगर जम्मू कश्मीर, अमृतसर पंजाब सहित अन्य प्रांतों के लाइसेंस जिले में दर्ज कर लिए गए। जबकि गृह विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि अन्य प्रांतों के लाइसेंसों को जिले में दर्ज करने के लिए पहले पुलिस महानिरीक्षक अपराध अनुसंधान से अनुमति लेना अनिवार्य है। ऐसे लाइसेंसों की संख्या अभी तक आधा दर्जन के लगभग सामने आई है।

एक जनप्रतिनिधि का भी नाम

शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े की सूची में चित्रकूट क्षेत्र के एक जनप्रतिनिधि का नाम भी है। उनके लाइसेंस में बिना आवेदन, बिना प्रक्रिया ही सीमावृद्धि कर दी गई है। उधर, 60 के लगभग लाइसेंसों की मूल नस्तियां गायब हैं।
ज्यादातर मामले एक ही कार्यकाल के
जांच में ज्यादातर फर्जीवाड़े एक ही लिपिक के कार्यकाल के मिले। एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मामलों में गड़बड़ी युगुल किशोर गर्ग सहायक ग्रेड 2 शस्त्र शाखा प्रभारी के कार्यकाल में हुई हैं। अभयराज सिंह और भैयालाल शर्मा का नाम भी सामने आया है। एसटीएफ अभी यह भी देखेगी कि मामले में संबंधित लाइसेंस धारक दोषी माने जाएंगे या नहीं।

पंजीरी की तरह बांटी सीमावृद्धि

शस्त्र लाइसेसों को जारी करते समय उसकी सीमा तय की जाती है। इसके बाद अगर सीमा वृद्धि चाहिए होती है तो उसके तय प्रावधानों के तहत आवेदन करना होता है लेकिन यहां शस्त्र शाखा से मनमानी तरीके से बिना सक्षम अनुमति के ही सीमा वृद्धि कर दी गई। हालात यहां तक रहे कि संबंधित नस्तियों में सीमा वृद्धि के आवेदन तक नहीं है। अर्थात बिना आवेदन और अनुमति के ही अनुमति अन्य प्रांतों के लिये सीमा वृद्धि कर दी गई। ऐसे मामले दो दर्जन से ज्यादा बताए जा रहे हैं। कई लाइसेंसों में स्थिति यह है कि लाइसेंस धारक ने आवेदन में एरिया मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश चाहा है और डीएम ने उसे मध्यप्रदेश की अनुमति दी लेकिन लाइसेंस धारक के लाइसेंस में सीमा संपूर्ण भारत दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं राज्य क्षेत्र की सीमा वृद्धि का अधिकार राज्य शासन के पास है लेकिन यहां की शस्त्र शाखा ने खुद ही सीमा वृद्धि कर दी।
मनमानी बढ़ा दी कारतूस की संख्या
लाइसेंस में एक फर्जीवाड़ा और पाया गया है जिसमें लाइसेंस धारकों को उनकी सीमा से ज्यादा कारतूस धारण करने की अनुमति दे दी गई और इसकी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जिस शस्त्र धारक को 10-25 कारतूस की अनुमति थी उसकी नस्ती में उपरिलेखन करते हुए 20-50 कर लाइसेंस में अंकित कर दिया गया। इस तरह यहां के लाइसेंस धारी मनमानी तरीके से कारतूस लेकर चलने लगे।

बिना लाइसेंस के सीमा वृद्धि

शस्त्र शाखा में किस कदर फर्जीवाड़ा और मनमानी राज चल रहा था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शस्त्र लाइसेंस जारी किये बिना ही एरिया वृद्धि हो गई। भियामऊ निवासी एक सख्श को लाइसेंस 2012 में जारी किया गया लेकिन उसके लाइसेंस की एरिया वृद्धि 2011 में ही हो गई। अधिकारी मान रहे हैं कि बेखौफ अमला दस्तावेज मिलान तक नहीं कर रहा था और मनमानी कार्यवाहियां कर रहा था।

" हमने सारे रिकॉर्ड एसटीएफ को सौंप दिए हैं। अभी जांच जारी है। जांच पूरी होने में कुछ दिन और लगेंगे।"
- सतेंद्र सिंह, कलेक्टर