NASA ने ढूंढा ‘सोने का ग्रह’, पृथ्वी का हर शख्स बन सकता है करोड़पति !

  • नासा (NASA) को अंतरिक्ष में 16-साइकी (16 Psyche) नाम का एक एस्टेरॉयड (asteroid) मिली है
  • 16-साइकी (16 Psyche) एस्टेरॉयड (asteroid) बेशकीमती धातुओं से बना हुआ है
  • यहां सोने से लेकर प्लेटिनम तक मौजूद है
 

By: Vivhav Shukla

Updated: 08 Oct 2020, 05:14 PM IST

नई दिल्ली। अंतरिक्ष (space) की दुनिया रहस्‍यों से भरी है, इन रहस्‍यों को समझने के लिए अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष के मिशन पर जाते हैं लेकिन अंतरिक्ष इतना बड़ा है कि इसके बारे में जितना पता चल जाए उतना ही कम है। अभी हाल ही में वैज्ञानिकों को मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीचोंबीच एक ऐसा क्षुद्रग्रह यानी एस्टेरॉयड (asteroid) का पता लगा है जहां बेशकीमती सोना और हीरे-जवाहरात मिलने की संभावना है। ये यहां इतनी मात्रा में मौजूद हैं कि अगर इसे पृश्वी पर ला दिया जाए तो यहां का हर एक इंसान करोड़पति बन जाएगा।

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नासा के मुताबिक इस क्षुद्रग्रह का नाम 16-साइकी (16 Psyche) है। ये एस्टेरॉयड (asteroid) आलू की तरह आकार में दिखाई देता है औऱ ये सोने, बहुमूल्य धातु प्लेटिनम, आयरन और निकल से बना हुआ है। नासा की माने तो इस क्षुद्रग्रह का व्यास लगभग 226 किलोमीटर है। यहां सोने और लोहे की भरपूर मात्रा मौजद है। अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक 16-साइकी (16 Psyche) पर लगभग 8000 क्वॉड्रिलियन पाउंड कीमत के बराबर लोहा मौजूद है।

The Times के मुताबिक अगर हम इसे लाने और बेचने या इसके इस्तेमाल में कामयाब हो सके तो धरती की मौजूदा आबादी में हरेक व्यक्ति को लगभग 9621 करोड़ रुपये मिल सकेंगे। The Times ने एक रिपोर्ट में बताया कि ये कीमत 16-साइकी (16 Psyche) पर मौजूद केवल लोहे की है। अभी तक यहां मौजूद सोने और प्लेटिनम के कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

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वहीं वैज्ञानिक और खनन विशेषज्ञ स्कॉट मूर ने का कहना है कि यहां यहां पर इतना सोना हो सकता है कि अगर ये धरती पर आ जाए तो दुनियाभर की सोने की इंडस्ट्री के लिए खतरा बन जाएगा। यहां इतनी मात्रा में सोना आने के बाद सोने की कीमत कौड़ी के भाव हो जाएगा।

बता दें अब नासा स्पेस एक्स के मालिक एलन मस्क की मदद से इस एस्टेरॉयड के बारे में और पता लगाने की कोशिश कर रहा है। स्पेस एक्स अपने अंतरिक्षयान से रोबोटिक मिशन इस एस्टेरॉयड पर भेजे सकता है। हालांकि इसे वहां जाने और स्टडी करके वापस आने में सात साल का समय लग जाएगा।

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