31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

वैज्ञानिकों का दावा : प्राकृति के लिए नहीं किया ये काम तो हो जाएगा सब खत्म

यूएन की रिपोर्ट ने प्रकृति के प्रति जताई चिंता प्रकृति नहीं रही तो खत्म होगा इंसानी अस्तिव धड़ल्ले से कर रहें हैं इंसान संसाधनों का इस्तेमाल
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Deepika Sharma

•

Updated: 10 May 2019, 5:10 PM IST

nature

वैज्ञानिकों का दावा : प्राकृति के लिए नहीं किया ये काम तो हो जाएगा सब खत्म

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र ( UN ) की एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अगर हम प्रकृति (NATURE )को बचाने में असफल रहे तो मनुष्य का अस्तित्व ही खतरें में आ जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि दस लाख किस्मों के जीवों ( species )की प्रजाती लुप्त होती जा रही हैं।
बता दें कि पृथ्वी ( earth ) पर रह रहे 10 लाख से भी ज्यादा प्रजातियों पर लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और 130 देशों की सहमती से जारी की गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर धरती पर मौजूद भिन्न प्रकार के जीवों को खो दिया गया, तो इंसान का अस्तित्व भी तबाह हो जाएगा।

मिनटों में पता चलेगा शरीर में बैक्टीरिया है या नहीं, वैज्ञानिकों ने बनाया नया उपकरण

वहीं यूएन बायोडाइवर्सिटी के प्रमुख रॉबर्ट वाटसन की ओर से वैश्विक जैवविविधता और ईकोसिस्टम पर की गई स्टडी ( study )से पता चला है कि "अगर जैवविविधता को गंवाते गए तो गरीबी घटाने, पर्याप्त भोजन ( food ), पानी ( water )की व्यवस्था करने, इंसान की सेहत सुधारने की हमारी क्षमता कम हो जाएगी। नतीजा यह होगा कि धरती पर कोई भी नहीं बचेगा।"

इन सैटेलाइटों की वजह से फानी तूफान का पहले से लगा था सटीक अनुमान, बचा ली गई लाखों लोगों की जान

पहली रिपोर्ट 2005 में इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन बायोडाइवर्सिटी एंड ईकोसिस्टम सर्विसेज (IPBES) ने दी। जिसमें इंसान के समक्ष भविष्य में आने वाले खतरे की बात कही गई थी। दुनिया के कुल 400 से भी अधिक विशेषज्ञों ने मिलकर अध्ययन करके एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें लिखा है कि अगर जीवों की किस्मों और ईकोसिस्टम में होने वाली गिरावट को ना रोका गया तो इंसान को भविष्य में होने वाले अकाल को झेलना पड़ सकता है ।

इन 50 साल में होने वाले बदलावों के कारण धरती और सागर के साथ जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्रजातियों के नष्ट होने की दर बढ़ गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार- आने वाले दशकों की सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि मानव जीवन में प्रकृति के अमूल्य योगदान का संरक्षण हो सके।

इंटरनेट एक्सप्लोरर 6 को खत्म करने की यूट्यूब इंजीनियरों ने रची थी साजिश

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर अब से भी "तुरंत और लक्षित प्रयास" किए जाएं तो प्रकृति को बचाया जा सकता है। लक्ष्य होना चाहिए कि 2050 और आगे तक के लिए नीतियों में जरूरी परिवर्तन किए जाएं। नीति निर्माताओं के लिए दिए गए तमाम सुझावों के अलावा वैज्ञानिकों ने आम लोगों से भी अपने रोजमर्रा के जीवन में जिम्मेदारी भरा व्यवहार करने को कहा है।