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सीधी में 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते प्रभारी मंडल संयोजक पकड़ाया, लोकायुक्त की कार्रवाई

Lokayukta Trap: निष्कासित रसोइये के लंबित वेतन भुगतान के लिए मांगे थे 50 हजार रुपये, कलेक्ट्रेट स्थित जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय में लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई।
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सीधी

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Shailendra Sharma

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Updated: 22 Oct 2026, 9:07 PM IST

sidhi lokayukta trap

lokayukta trap bribe sanjay singh tribal welfare, कार्रवाई करती लोकायुक्त की टीम और इनसेट में रिश्वतखोर प्रभारी मंडल संयोजक (Source-Patrika)

Sidhi Lokayukta Trap: मध्यप्रदेश के सीधी में लंबित वेतन का भुगतान कराने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में लोकायुक्त पुलिस रीवा की टीम ने गुरुवार शाम जनजातीय कार्य विभाग के प्रभारी मंडल संयोजक संजय सिंह को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी अधीक्षक के मूल पद पर पदस्थ है। कार्रवाई कलेक्ट्रेट स्थित जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय में शाम करीब 6.30 बजे की गई। मामले में अधीक्षिका सुनीता पांडेय की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

निष्कासित रसोइये से मांगी थी रिश्वत

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता अशोक कुमार योगी जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत दैनिक वेतनभोगी रसोइये के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2006 में संख्या अधिक होने के कारण उसे काम से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद से लंबित वेतन के भुगतान को लेकर मामला अटका हुआ था। शिकायत के मुताबिक, लंबित वेतन का भुगतान कराने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने उसका सत्यापन कराया। सत्यापन में रिश्वत मांगने संबंधी शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई। गुरुवार शाम लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए प्रभारी मंडल संयोजक संजय सिंह को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ लिया।

अधीक्षिका की भूमिका की भी होगी जांच

शिकायत में अधीक्षिका सुनीता पांडेय की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, इस संबंध में आगे विवेचना की जाएगी और उनकी भूमिका की जांच के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले में दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया है। लोकायुक्त रीवा की 15 सदस्यीय टीम ने टीआई नरेश बेहरा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की। ट्रैप की कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को सीधी स्थित उच्च विश्राम गृह ले जाया गया, जहां आगे की वैधानिक प्रक्रिया की गई।