
खाटूश्यामजी मेला। फाइल फोटो- पत्रिका
सीकर। प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए भले ही शुद्ध के लिए युद्ध अभियान को वर्ष भर चलाने के निर्देश हों, लेकिन हकीकत यह है कि सीकर जिले में मिलावट का कारोबार बेलगाम हो गया है। इसकी बानगी यह है कि विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी के लक्खी मेले में विभाग के बड़े-बड़े दावों के बीच लिए गए 81 सैम्पलों में से 16 फेल और 3 अनसेफ मिलने से जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
चिंताजनक बात यह है कि मेले के दौरान लिए गए मसालों के तीन सैम्पलों में केमिकल मिले। टीम ने 21 फरवरी से 1 मार्च के बीच खाटूश्यामजी मेले में 81 सैम्पल लिए थे, जिनमें से 13 अमानक और 3 अनसेफ मिले। जबकि 12 सैम्पलों की रिपोर्ट बकाया है। सूत्रों के अनुसार कमोबेश यही हाल जीण माता मेले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का है।
मिलावट का कारोबार करने वालों ने अब नए तरीके अपना लिए हैं। यही कारण है कि अभियान के दौरान लिए गए सैम्पलों की जांच में मसालों और दूध से बनी मिठाइयों में नॉन परमिटेड रंग मिले। मिलावटियों ने पनीर बनाने से पहले उसका फैट निकाल लिया और उसकी जगह रिफाइंड ऑयल मिला दिया। इसके बाद पनीर को पैक कर बाजार में बेचा गया। हरी मिर्च और धनिया पाउडर में तय मात्रा से तीन गुना तक अधिक रंग पाया गया। वहीं मिठाइयों में भी नॉन परमिटेड रंग मिले।
मेले की अवधि के दौरान टीम ने मावा के 26 सैम्पल लिए। इनमें से एक सैम्पल की रिपोर्ट अमानक मिली। दूध के 8 और दूध से निर्मित खाद्य वस्तुओं के 21 सैम्पल लिए गए, जिनमें से 4 की रिपोर्ट अमानक आई। घी और तेल के 8 सैम्पल खाद्य जन प्रयोगशाला जयपुर भेजे गए थे, जिनमें से एक की रिपोर्ट अमानक आई।
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पनीर के 5 सैम्पल प्रयोगशाला भेजे गए और पांचों ही जांच में अमानक पाए गए। अन्य खाद्य वस्तुओं के 4 और मसालों के 9 सैम्पल लिए गए थे। मसालों के सैम्पलों में 2 की रिपोर्ट अमानक और 3 सैम्पल जांच में अनसेफ पाए गए। अमानक और अनसेफ रिपोर्ट आने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
खाटूश्यामजी मेले के दौरान लिए गए सैम्पलों की रिपोर्ट आ गई है। जिन व्यापारियों के सैम्पल अमानक और अनसेफ पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
25 Mar 2026 05:16 pm
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