बिना कुछ बताए किसी का भी नाम व मन का हाल बताने पर हर कोई अचरज से आवाक रह गया। बाघेश्वर व सालासन बालाजी, खाटूश्यामजी और जीणमाता के जयकारों व रामधुन के साथ दरबार की शुरुआत करने से पहले उन्होंने राजस्थान को आस्था व शूरवीरों की धरती कहा। बोले, जहां मीरा व महाराणा प्रताप जैसी भक्त और देशभक्त हो और चेतक जैसे घोड़े व रामप्रसाद जैसे हाथी में ही देशभक्ति का जज्बा होता है, उस राजस्थान का होने पर यहां के लोगों को बड़ा गर्व होना चाहिए।