
Ai Generated Image
डॉ. सचिन माथुर / दीनबंधु वशिष्ठ
एक तरफ उच्च शिक्षित युवा चतुर्थ श्रेणी की नौकरी स्वीकार कर रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकारी नौकरी मिल जाने के बाद उसे छोड़कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और पटवारी बन गए। यह दोनों मामले सरकारी नौकरी को लेकर युवा मन के बदलते द्वंद्व सामने रखते हैं। एक ओर युवा सोचता है - पहले नौकरी मिले, पद बाद में देखेंगे। दूसरी ओर युवा कह रहा है - नौकरी मिल गई, लेकिन अगर परिवार के लिए समय ही नहीं बचा तो ऐसी नौकरी का क्या फायदा?
सीकर. प्रदेश में हाल में हुई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नई भर्ती से जिले में शिक्षा विभाग में नियुक्त हुए 710 कर्मचारियों में से 267 बीएड और 23 बीटेक योग्यताधारी यानी इंजीनियर हैं। 10 कर्मचारी नेट की डिग्री के साथ कॉलेज व्याख्याता पद की भी योग्यता रखते हैं।
यही नहीं, बीएसटीसी, स्नातकोत्तर, डीएलएड, एलएलबी और एलएलएम योग्यताधारियों की भी भरमार है। लिहाजा कई स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रधानाचार्य से भी ज्यादा शिक्षित होने की विडंबना हो गई है। ये आंकड़े उच्च शिक्षित बेरोजगारी का स्पष्ट संकेत कर रहे हैं। योग्यतानुसार रोजगार नहीं मिलने पर चतुर्थ श्रेणी के रूप में नियुक्त होना पड़ा, लेकिन वे भी उच्च पदों के लिए तैयारी कर रहे हैं।
ये सही है कि नवनियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में बहुत से उच्च शिक्षित हैं। शिक्षा निदेशालय से हाल में सभी कर्मचारियों की योग्यता की जानकारी भी मांगी थी, जिसकी सूची उपलब्ध करवाई थी।- विक्रम सिंह शेखावत, एडीईओ, (मा.शि)
खास बात ये भी है कि शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती की न्यूनतम योग्यता 10वीं पास कोई भी कर्मचारी नियुक्ति नहीं ले पाया। हां... 12वीं पास 48 अभ्यर्थी जरूर ये पद हासिल करने में कामयाब रहे। इसके अलावा 167 कर्मचारी बीए, 115 बीए-एमए और 236 बीएससी योग्यताधारी हैं। एक-एक एलएलबी व एलएलएम भी है। भर्ती में 23 बीटेक योग्यताधारी में सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की संख्या ज्यादा है। साथ ही कॉलेज व्याख्याता पद की योग्यता रखने पर भी 10 नेट योग्यताधारी हैं। सीकर निवासी युवक ने बताया कि ओवरएज होने से पहले नौकरी ज्वॉइन कर ली। कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी चल रही है।
बांसवाड़ा. सरकारी नौकरी का सपना पूरा हुआ, पुलिस की वर्दी भी मिली... लेकिन सुकून नहीं मिला। बांसवाड़ा में करीब 35 युवाओं ने पुलिस की नौकरी को अलविदा कहकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और पटवारी की नौकरी ज्वॉइन कर ली। वजह इस्तीफे में भले साफ नहीं लिखी, लेकिन कहानी बहुत कुछ कहती है। पुलिस की 24 घंटे की ड्यूटी, काम के बोझ और परिवार को समय न दे पाने के कारण उन्हें लगता है कि उनकी स्वतंत्रता छिन रही है। इसलिए कई युवा अब दूसरे विभागों में उन नौकरियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, भले ही वहां वेतन और सम्मान दोनों कम हों।
जिले में बीते दिनों करीब 35 युवाओं ने सरकारी नौकरी इस्तीफा दिया। इनमें से अधिकांश वे हैं, जिन्हें पुलिस विभाग में सेवा देते हुए अधिक समय नहीं बीता है। प्रियंका, यश, अभिषेक, आशीष, पृथ्वीराज, डिम्पल पाटीदार एवं लोकेंद्र ने पुलिस विभाग से इस्तीफा देकर चतुर्थ श्रेणी सेवा को ज्वॉइन किया। जबकि विकास चरपोटा, सुरेश मेघवाल, आशीष डामोर, निर्मल बारिया, संजय मईडा पटवारी बन गए। ये सभी 24 घंटे अलर्ट रहने की दिनचर्या में खुद को ढाल नहीं सके। पूछने पर एक ने बताया कि अधिकांश पर्व व सामूहिक अवकाश पर भी पुलिस को अतिरिक्त सेवाएं देनी पड़ती हैं। सबसे ज्यादा सुरक्षा की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी इनके कंधों पर होती है।
वर्तमान पीढ़ी भागदौड़ भरी जिंदगी में पैसा कमाने से ज्यादा मानसिक सुकून और स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रही है। पुलिस विभाग में समय की निश्चितता न होने के साथ ही काम का बोझ भी अधिक है। जिससे वे महसूस करते हैं कि यहां उनकी स्वतंत्रता छिन रही है। काम के बोझ के चलते वे जीवन में संतुलन नहीं बैठा पा रहे हैं। - डॉ. प्रदीप राठौड़, मनोरोग विशेषज्ञ बांसवाड़ा
Updated on:
28 Sept 2026 12:04 pm
Published on:
28 Sept 2026 12:04 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
