
नितेश सिवाच (Photo -IANS)
Nitesh Siwach: एशियन गेम्स 2026 में भारत का ग्रीको-रोमन कुश्ती का गोल्ड मेडल जीतने का सपना अधूरा रह गया। पुरुष वर्ग के 97 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में नितेश सिवाच को हार का सामना करना पड़ा। जापानी खिलाड़ी यूरी नकाजातो ने उन्हें हरा दिया। इसके साथ ही नितेश को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। यह मुकाबला नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में खेला गया। इस प्रदर्शन के साथ ही नितेश ने इतिहास रच दिया है। वह एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले देश के दूसरे ग्रीको-रोमन पहलवान बन गए हैं। उनसे पहले साल 1962 में मारुति माने ने इसी भार वर्ग में सिल्वर जीता था।
जापानी खिलाड़ी यूरी नकाजातो के खिलाफ फाइनल मुकाबला बहुत कठिन रहा। जापानी पहलवान ने शुरुआत से ही मैच पर अपनी पकड़ बना ली। पहले दौर के बीच में नितेश को निष्क्रियता के कारण पेनल्टी मिली। इसका फायदा उठाकर नकाजातो ने दो अंक हासिल कर लिए। इसके बाद भारतीय पहलवान को पूरी तरह से रक्षात्मक होना पड़ा। हालांकि नितेश ने अच्छी टक्कर दी और अंतर को ज्यादा नहीं बढ़ने दिया।
ब्रेक के समय स्कोर शून्य के मुकाबले दो था। नितेश को बचे हुए तीन मिनट में शानदार वापसी की जरूरत थी। लेकिन जापानी खिलाड़ी ने अपनी बढ़त बनाए रखी। नकाजातो ने खेल की गति पर पूरा नियंत्रण रखा। उन्होंने नितेश को कोई मौका नहीं दिया। जापानी पहलवान ने स्कोर 4-0 कर दिया। उन्होंने नितेश को जमीन पर गिराकर चित करने की भी कोशिश की। नितेश ने हार नहीं मानी और डटे रहे। लेकिन मैच में वापसी करना बहुत मुश्किल हो गया था। अंत में नकाजातो ने मुकाबला जीत लिया और गोल्ड अपने नाम किया।
भले ही नितेश गोल्ड नहीं जीत सके, लेकिन उनका यह अभियान ऐतिहासिक रहा। वह नागोया में 2026 की एशियाई चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट के रूप में पहुंचे थे। फाइनल से पहले उन्होंने दो बेहतरीन मुकाबले जीते। नॉकआउट अभियान की शुरुआत में उन्होंने शानदार खेल दिखाया। क्वार्टर फाइनल मैच में उन्होंने तुर्कमेनिस्तान के अमनबेर्दी अगामम्मेदोव को 7-1 के बड़े अंतर से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में उनका मुकाबला मंगोलिया के गनबातारिन गनखुयाग से हुआ।
इस मुकाबले में उन्होंने और भी उम्दा प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 9-0 के भारी अंतर से शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही उन्होंने फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। यह जीत सिर्फ फाइनल में पहुंचने तक सीमित नहीं थी। इस जीत ने 64 साल के सूखे को खत्म कर दिया। भारत की ग्रीको-रोमन कुश्ती में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। देश को इस वर्ग में ऐसा मुकाम 1962 के बाद अब जाकर मिला है।
Updated on:
01 Oct 2026 05:16 pm
Published on:
01 Oct 2026 04:52 pm
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