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तीन माह से भुगतान को तरस रहे धरती पुत्र, शादी-ब्याह सहित अन्य खर्चों के लिए उठानी पड़ रही है आर्थिक परेशानी

सरकार द्वारा उनके खातों में रुपए नहीं डालने से उनको बाजार से ब्याज पर रुपए उधार लेने पड़ रहे हैं।  
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टोंक

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Pawan Kumar Sharma

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Updated: 22 Mar 2018, 1:42 PM IST

किसानों को भुगतान

मालपुरा. समर्थन मूल्य पर किसानों के मूंग व उड़द की खरीद तो कर ली, तीन माह बाद भी किसानों को भुगतान के लिए तरसना पड़ रहा है।

मालपुरा. कृषि उपज मण्डी समिति में नैफेड व राजफेड के निर्देशों पर क्रय-विक्रय सहकारी समिति की ओर से समर्थन मूल्य पर किसानों के मूंग व उड़द की खरीद तो कर ली, लेकिन तीन माह बाद भी किसानों को भुगतान के लिए तरसना पड़ रहा है। इधर, चार अप्रेल से चना व सरसों की खरीद की तैयारियां शुरू हो गई है। किसानों ने बताया कि पूर्व में ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरने के बाद दिसम्बर माह में मूंग व उड़द जिंस को कृषि उपज मण्डी में लगे सरकारी कांटे पर समर्थन मूल्य पर तोला गया था, लेकिन आज तीन माह बीतने वाले हंै, लेकिन बैंक खातों में रुपए नहीं आए हंै। इसके चलते परिवार में शादी-ब्याह सहित अन्य खर्चों के लिए आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मार्च माह में बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए ऋण सहित अन्य भुगतान भी करने हैं, लेकिन सरकार द्वारा उनके खातों में रुपए नहीं डालने से उनको बाजार से ब्याज पर रुपए उधार लेने पड़ रहे हैं। क्रय-विक्रय सहकारी समिति के मैनेजर ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि नैफेड व राजफेड के निर्देशों पर समिति की ओर से 12 अक्टूबर 2017 से समर्थन मूल्य पर खरीद का कार्य शुरू किया। टोकन के आधार पर 3 हजार 530 किसानों की ओर से लाई गई मूंग, उड़द, मूंगफली के 608 बैग, मूंग के 90 हजार 620 बैग तथा उड़द के 22 हजार 461 बैग सहित कुल 31 करोड़ 47 लाख की खरीद की गई थी। इसमें से 213 किसानों के लगभग 3 करोड़ रुपए का भुगतान होना शेष है। राजफेड के अधिकारियों ने बताया कि नेफैड से भुगतान मिलते ही सीधे किसानों के बैंक खातों में पैसा डाला जाएगा।

नही मिल रहा भुगतान
देवली. पनवाड़ निवासी महिला अपनी ही राशि प्राप्त करने के लिए डाक कार्यालय के चक्कर दर चक्कर लगा रही है। प्रकरण के अनुसार पीडि़त मंजू देवी पत्नी प्रवीण सैन निवासी पनवाड़ है। उसने गत 24 नवम्बर 2018 को दस हजार रुपए के स्थानीय डाकघर से किसान विक्रय पत्र खरीदे। यह पत्र गत 25 नवम्बर 2017 को परिपक्व हो गए, लेकिन कई माह बीत जाने के बावजूद महिला को डाक विभाग की ओर से भुगतान नहीं किया गया। इसके लिए उसने स्थानीय कार्यालय से लेकर जिला कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन डाककर्मी उसे सभी जगह से झूठे आश्वासन दे रहे है। ऐसे में महिला को परेशान होना पड़ रहा है।