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कई जिलों की प्यास बुझाते…खुद प्यासे रह जाते, धार्मिक-टूरिजम कॉरिडोर की भी दरकार

Rajasthan Assembly Election 2023: धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी का अद्भुत संगम है डिग्गी-मालपुरा-टोडारायसिंह और बीसलपुर तक का मार्ग। जयपुर से 70 किलोमीटर दूर मैं जा पहुंचा जन-जन की आस्था के केंद्र डिग्गी कल्याणजी...।
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टोंक

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Vikas Jain

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Updated: 1 Jul 2023, 8:20 AM IST

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विकास जैन
टोंक। Rajasthan Assembly Election 2023: धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी का अद्भुत संगम है डिग्गी-मालपुरा-टोडारायसिंह और बीसलपुर तक का मार्ग। जयपुर से 70 किलोमीटर दूर मैं जा पहुंचा जन-जन की आस्था के केंद्र डिग्गी कल्याणजी...। डिग्गी बस स्टैंड पर मन विचलित हुआ...यह ऐसा धार्मिक कस्बा है, जहां सावन और भादो के दौरान डेढ़ माह में ही करीब 25 लाख पदयात्री पहुंचते हैं...लेकिन इनके रहने-खाने सहित अन्य सुविधाओं के इंतजाम सरकारी स्तर पर न के बराबर ही हैं। बस स्टैंड पर ही बैठे प्रेमचंद और भंवरलाल सैन ने बताया कि यहां विभिन्न समाजों की करीब 25 धर्मशालाएं हैं... लाखों यात्री आते हैं तो उनकी व्यवस्थाएं डिग्गी कल्याणजी के आशीर्वाद से लोग ही करते हैं। सरकारी इंतजाम के नाम पर यहां प्रशासन सिर्फ अलर्ट पर रहता है।

डिग्गी कल्याणजी तीर्थ कॉरिडोर, डिग्गी-मालपुरा-टोडा का रेल पथ से जुड़ाव, डिग्गी अंचल में धार्मिक स्थलों का विकास, जयपुर, लावा, मालपुरा, दूदू, फागी के विभिन्न मार्गों से डिग्गी पदयात्री परिपथ का निर्माण और संरक्षण, डिग्गी कल्याणजी तीर्थ को राष्ट्रीय क्षितिज पर लाना... यहां के बड़े मुद्दे हैं। बस स्टैंड पर रामसहाय ने बताया कि तीस वर्ष पहले जयपुर से टोडारायसिंह रेल चलती थी, लेकिन अब तो उसकी पटरियां तक उखाडकऱ वहां जयपुर-बीसलपुर पेयजल लाइन डाल दी गई। मालपुरा में एडवोकेट सतीश जैन का कहना था कि द्वारका-सोमनाथ, उज्जैन, वाराणसी और अयोध्या की तर्ज पर डिग्गी कल्याणजी का विकास होना चाहिए। मालपुरा को जिला बनाने की मांग अब यहां के लोगों के हृदय से जुड़ चुकी है। मालपुरा के पुराने अस्पताल को जनाना अस्पताल बनाया जाना चाहिए। यहां से बीसलपुर की ओर चलने पर मैं टोरडी सागर बांध पहुंचा। कभी पानी से लबालब रहने वाला यह बांध अब रीत चुका है। यह बांध पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होता था।
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टोरडी से 23 किलोमीटर चलकर मैं टोडारायसिंह पहुंचा। अद्भुत इतिहास को अपने में समेटे इस कस्बे के लिए दशकों पहले रेल चलाई गई, लेकिन बाद की सरकारों ने उसे भी बंद कर दिया। अब रेलवे के कुछ अवशेष और सिगनल नजर आते हैं। टोडारायसिंह कोर्ट में एडवोकेट एम. इस्लाम, घनश्याम शर्मा, रवि जैन और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाललाल जाट ने बताया कि शाम होते ही यह कस्बा परिवहन सुविधा विहीन हो जाता है। बीसलपुर पर हैंगिंग ब्रिज यहां की बड़ी जरूरत है। प्रियंक जैन ने बताया कि रात के समय लोगों को निजी वाहन किराए पर लेकर ही सफर करना पड़ता है। टोडारायसिंह कोर्ट में अधिवक्ताओं ने बताया कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है, लेकिन चिरंजीवी योजना के तहत विभिन्न पैकेज का दायरा निजी अस्पतालों तक बढ़ाना चाहिए।
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टोडारायसिंह से आगे बढ़ते हुए मैं पहुंचा देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र की ओर... बीसलपुर बांध से पहले थड़ी लगाने वाले रमेश बोले, सावन में हजारों लोग यहां घूमने आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें मायूसी हाथ लगती है। बीसलपुर बांध पार कर हम राजमहल पहुंचे। एडवोकेट दीपक जैन ने बताया कि बांध के गेट खोलते ही दूसरी ओर जाने का रास्ता बंद हो जाता है। बांध के उपर से रास्ता है, लेकिन वह आम आवाजाही के लिए नहीं है। ककोडिय़ा गांव में एक दुकान पर भोजराज, भोमाराम और रामेश्वर का कहना था कि बीसलपुर कई जिलों के लोगों की प्यास बुझाता है, लेकिन उनके यहां तो कई बार दो दिन में पानी आता है। उनियारा के लोग फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं।