
राणोली-कठमाणा। रानोली में मां की मृत्यु पर उसके अंतिम संस्कार को लेकर मुखाग्नि देती बेटी।
राणोली-कठमाणा. बेटा कुल का दीपक होता हैं, बेटे के बिना माता-पिता को मुखाग्नि कौन देगा, लेकिन अब यह बातें बीते जमाने की हो गई। यह साबित किया हैं रानोली की बेटी कृष्णा व रामा ने। जानकारी के अनुसार रानोली में बाबूलाल विजयवर्गीय की पत्नी दुर्गा देवी (50) विजयवर्गीय का बीमारी के चलते निधन हो गया था।
बाबूलाल के दो बेटियां कृष्णा और रामा है, जिनकी कोटा शादियां हो चुकी है। बड़ी बेटी कृष्णा मां की मृत्यु के समाचार सुनकर रानोली पहुंची और कहा कि उनकी मां का अंतिम संस्कार वह ही करेगी। पिता बाबूलाल ने बेटियों का साथ दिया।
ऐसे में रानोली गांव में पहली बार रूढ़ीवादी परम्पराओं के बंधन को तोड़ते हुए परम्पराओं से हटकर बड़ी बेटी कृष्णा ने रविवार को अपनी माता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया।
इस तरह बेटा न होने की वजह से बेटी ने बेटे का फर्ज निभाया। बड़ी बेटी कृष्णा विजयवर्गीय ने माता को न सिर्फ मुखाग्नि दी, बल्कि अंतिम संस्कार की हर वह रस्म निभाई, जिनकी कल्पना कभी एक पुत्र से की जाती है।
समय के साथ सोच बदलने की जरूरत
मृतका के पति बाबूलाल विजयवर्गीय का कहना है कि समय से साथ सोच बदलने की जरूरत है। आज के समय में बेटा-बेटी बराबर हैं। उन्होंने बेटियों को बेटों की तरह पाला है।
कभी दोनों बहनों में किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं किया। ऐसे में उसकी बेटियों ने ही मेरी पत्नी की मृत्यु के बाद हिन्दू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार के सारे फर्ज पूरे किए है।
बेटियां क्यों नहीं...
बेटी कृष्णा व रामा ने कहा कि आज जमाना बदल गया है, पुरानी कुरीतियां रही हैं कि दाह संस्कार का काम केवल बेटे ही कर सकते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है, जमाना बदल रहा है।
जो काम बेटे कर सकते हैं, उस काम को बेटियां भी कर सकती हैं। आज लड़कियों का जमाना हैं। यह हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
हमने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया है और हम वह सभी कार्य करेंगे, जो एक बेटे को करने चाहिए। इसके बाद सभी रिश्तेदारों ने एक राय होकर बड़ी बेटी को ही अंतिम संस्कार के लिए आगे किया और उसे ढांढ़स बंधाया।
Published on:
11 Jun 2018, 7:10 AM IST
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