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video: विद्यालय के नाम से ही कतराने वाली जाति विशेष की इन बेटियां के पढ़ाई के जज्बें को देखकर हर कोई है हैरान

कभी इस जाति की बालिकाओं का नामांकन शून्य होता था। आज विद्यालय में 50 से अधिक बालिकाएं अध्ययनरत हंै।  

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 विद्यालय में पढऩे आई जाति विशेष की बालिकाएं

राजमहल के बालिका विद्यालय में पढऩे आई जाति विशेष की बालिकाएं।

राजमहल. पांच साल पहले तक विद्यालय के नाम से ही कतराने वाली जाति विशेष की बालिकाएं आज प्राथमिक शिक्षा में अन्य समाज की अपेक्षा दोगुने से अधिक संख्या में नामांकन दर्ज करा बालिका शिक्षा के नाम पर एक मिसाल पेश कर रही है।

अन्य जाति व समुदाय से अलग रहन-सहन व खान-पान के कारण अपने घरों तक सीमित रहने वाली कंजर जाति की बालिकाओं को सरकार व प्रशासन की ओर से शिक्षा में सहयोग के साथ समय-समय पर उचित मार्ग दर्शन मिले तो इस जाति की बालिकाएं उच्च शिक्षा ग्रहण कर समाज व गांव का नाम रोशन कर सकती है।


राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिकाओं ने बताया कि कभी इस जाति की बालिकाओं का नामांकन शून्य होता था। आज विद्यालय में 50 से अधिक बालिकाएं अध्ययनरत हंै। ये अन्य समाजों की बालिकाओं की संख्या से दोगुनी है। अध्यापिकाओं ने बताया कि इन बालिकाओं में पढ़ाई के प्रति लगन भी है।

पढ़े तो बढ़ें आगे
पांच वर्षों में कंजर जाति के लोगों ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही विद्यालय में बालिकाओं का सबसे अधिक नामांकन कराकर मिसाल पेश की है। हालांकि मार्ग दर्शन व जाति बंधन के चलते ये बालिकाएं कक्षा 8 तक ही शिक्षा ग्रहण करती है।

इसके बाद परिजन इन्हें आगे की शिक्षा नहीं दिला पाते। इससे ये आगे बढऩे से वंचित हो रही है। जाति विशेष की ये बालिकाएं सामाजिक नियमों के चलते बाल विवाह का शिकार हो जाती हैं। कई बालिकाएं परिवार में आर्थिक तंगी के कारण आगे की शिक्षा से वंचित हो जाती हैं।

रोजगार का अभाव
इस जाति के कई लोगों ने बताया कि उनके समाज में मार्गदर्शन का अभाव रहने से अन्य उन्हें घृणा की दृष्टि से देखते हैं। इससे उनके पास रोजगार का अभाव भी है।

सरकार की ओर से उन्हें रोजगार मुहैया कराने के लिए नवजीवन जैसी योजनाएं भी चलाई, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि बलदते समय के साथ बदलते रिवाजों के कारण समाज में भी अब बदलाव आने लगा है। इसके चलते समाज में बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिला है।

मुझे यहां आए एक वर्ष ही हुआ है। यहां इस जाति का नामांकन नहीं के बराबर था। इसके चलते समय-समय पर अभिभावकों से मिलकर नामांकन बढ़ाने का प्रयास किया है।
उपेन्द्रनारायण शर्मा, प्रधानाध्यापक, राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय राजमहल।

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