चामुंडा माता मंदिर में पुरुष बैठकों का आयोजन करते हैं, जहां सामाजिक सुधार, जागृति आदि महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा कर कई निर्णय लिए जाते हैं। मेले में अलग-अलग समूह बनाकर ढोल मंजीरों की थाप पर भजनों की प्रस्तुतियां देते हैं, वहीं भजनों पर नृत्य करके आनंद लेते हैं।