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इस्&zwj;लामिया शिक्षा के केंद्र देवबंद का नाम सभी को पता है। यहां स्थित दारुल उलूम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और एशिया का सबसे बड़ा मदरसा माना जाता है। देवबंद सहारनपुर का एक कस्&zwj;बा है, करीब 52 किमी दूर है। <strong>इतिहास</strong> बताया जाता है कि यहां ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिससे पता चलता है क&zwj;ि इसका इतिहास हजारो साल पुराना है। कहा जाता है क&zwj;ि यह एक प्रागैतिहासिक नगर है। यहां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी मंदिर के गेट पर लगा शिलालेख अज्ञात काल का बताया जाता है। इसको आज तक कोई पढ़ नहीं पाया है। यहां राधावल्लभ का ऐतिहासिक मंदिर भी है। <strong>कस्&zwj;बा</strong> सहारनपुर का यह कस्&zwj;बा मुस्लिम बाहुल्&zwj;य है। देवबंद में एक-तिहाई आबादी हिंदुओं की है। विभाजन के बाद पंजाबी और सिख समुदाय के लोग भी यहां आकर बस गए थे। रेलवे रोड पर एक गुरुद्वारा भी है। कस्&zwj;बे में इसाई भी रहते हैं लेकिन उनकी गिनती बहुत कम है।


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