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दिवाली पर करना चाहते हैं रामलला के दर्शन? कम बजट में ऐसे बनाएं अयोध्या घूमने का प्लान

दिवाली पर रामलला के दर्शन और अयोध्या के दीपोत्सव का नजारा देखना चाहते हैं? जानिए कम बजट में यात्रा की योजना बनाने का तरीका और किन खर्चों को पहले से ध्यान में रखना जरूरी है।
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Adarsh Thakur

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Updated: 2 Nov 2026, 5:21 PM IST

Ayodhya Trip on Budget

इमेज सोर्सः Social Media, Edited with Gemini

दिवाली के मौके पर अयोध्या की रौनक देखने और रामलला के दर्शन करने की इच्छा कई लोगों की होती है। सरयू के घाटों पर दीपों की जगमगाहट, मंदिरों की सजावट और राम मंदिर में दर्शन का अनुभव इस यात्रा को खास बना सकता है। लेकिन त्योहार के समय होटल, परिवहन और खाने-पीने का खर्च बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में अगर आप पहले से यात्रा की योजना बनाते हैं, तो सीमित बजट में भी अयोध्या घूम सकते हैं।

साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। अयोध्या में दीपोत्सव का मुख्य आयोजन दिवाली की पूर्व संध्या पर होने की संभावना है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इसलिए होटल और यात्रा की बुकिंग समय रहते करना बेहतर रहेगा।

राम मंदिर में दर्शन के लिए नहीं देना पड़ता शुल्क

अयोध्या यात्रा का सबसे जरूरी पहलू यह है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में सामान्य दर्शन के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता। मंदिर में सामान्य दर्शन के लिए श्रद्धालु निर्धारित व्यवस्था के अनुसार जा सकते हैं। सुगम दर्शन और आरती के लिए उपलब्ध पास भी निशुल्क होते हैं।

मंदिर के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार श्रद्धालु दर्शन या आरती के लिए पास की जानकारी ले सकते हैं। किसी एजेंट या अनजान वेबसाइट को वीआईपी दर्शन के नाम पर पैसे न दें। पास और दर्शन से जुड़ी जानकारी केवल मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक पोर्टल से ही जांचें।

कम बजट में कहां ठहरें?

अयोध्या में ठहरने के लिए धर्मशाला, गेस्ट हाउस और बजट होटल जैसे विकल्प मिल सकते हैं। अगर आप कम खर्च में यात्रा करना चाहते हैं, तो मंदिर के बिल्कुल पास महंगे होटल लेने के बजाय थोड़ी दूरी पर ठहरने का विकल्प देख सकते हैं।

1. धर्मशाला: कम बजट वाले यात्रियों के लिए धर्मशाला अच्छा विकल्प हो सकती है। यहां सुविधाएं सामान्य हो सकती हैं, इसलिए बुकिंग या पहुंचने से पहले ठहरने की व्यवस्था की पुष्टि जरूर करें।

2. बजट होटल और गेस्ट हाउस: परिवार के साथ यात्रा करने वालों के लिए साधारण होटल या गेस्ट हाउस उपयोगी हो सकते हैं। दिवाली के आसपास कमरों की मांग बढ़ने से किराया भी बढ़ सकता है।

3. फैजाबाद में ठहरने का विकल्प: अगर अयोध्या के मुख्य इलाके में होटल महंगे मिल रहे हैं, तो फैजाबाद की तरफ ठहरने के विकल्प देख सकते हैं। हालांकि, मंदिर और घाटों तक पहुंचने में लगने वाले समय और स्थानीय परिवहन का खर्च भी बजट में जोड़ें।

अयोध्या घूमने के लिए कितने दिन रखें?

अयोध्या की प्रमुख धार्मिक जगहों और सरयू घाटों को देखने के लिए 2 दिन का प्लान बनाया जा सकता है। अगर आप दीपोत्सव भी देखना चाहते हैं, तो यात्रा में एक दिन अतिरिक्त रखना सुविधाजनक रहेगा।

पहला दिन: राम मंदिर और आसपास के मंदिर

सुबह राम मंदिर में दर्शन के लिए जाएं। इसके बाद हनुमानगढ़ी और कनक भवन के दर्शन कर सकते हैं। दोपहर में आराम करने के बाद शाम को सरयू घाट पहुंचें और सरयू आरती में शामिल हों।

दूसरा दिन: दीपोत्सव और सरयू घाट

दीपोत्सव के दिन सुबह हल्का कार्यक्रम रखें। दोपहर के बाद आयोजन स्थल और घाटों की तरफ जाने की योजना बनाएं। भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के कारण रास्तों पर बदलाव हो सकता है, इसलिए प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। शाम को दीपोत्सव का नजारा देखने के लिए समय से पहुंचें।

तीसरा दिन: आसपास की जगहें और वापसी

अगर आपके पास तीसरा दिन है, तो नागेश्वरनाथ मंदिर और अयोध्या के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों को देख सकते हैं। इसके बाद अपनी ट्रेन या बस के समय के अनुसार वापसी की तैयारी करें।

अयोध्या कैसे पहुंचें?

अयोध्या पहुंचने के लिए ट्रेन, बस, सड़क और हवाई यात्रा के विकल्प मौजूद हैं।

ट्रेन से: अयोध्या धाम जंक्शन और अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन की उपलब्धता जांच सकते हैं। दिवाली के समय टिकटों की मांग बढ़ जाती है, इसलिए पहले से आरक्षण कराना बेहतर है।

बस से: लखनऊ, गोरखपुर और आसपास के कई शहरों से अयोध्या के लिए सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। त्योहार के समय ट्रैफिक और रूट डायवर्जन की वजह से यात्रा में अतिरिक्त समय लग सकता है।

हवाई जहाज से: अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। इसके अलावा लखनऊ और गोरखपुर हवाई अड्डों से भी सड़क मार्ग के जरिए अयोध्या पहुंचा जा सकता है।

कितना हो सकता है अयोध्या यात्रा का बजट?

अयोध्या की यात्रा का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस शहर से आ रहे हैं, कितने दिन रुकेंगे और किस तरह का होटल चुनते हैं। नीचे 2 रात और 3 दिन की यात्रा के लिए एक सामान्य अनुमान दिया गया है। इसमें अयोध्या तक आने-जाने का किराया शामिल नहीं है।

खर्च का प्रकारअनुमानित बजट
बजट होटल या धर्मशाला₹500 से ₹1,500 प्रति रात
भोजन₹400 से ₹700 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन
स्थानीय परिवहन₹200 से ₹500 प्रतिदिन
मंदिर दर्शननिशुल्क
3 दिन का कुल खर्चकरीब ₹4,000 से ₹7,000 प्रति व्यक्ति

ये सामान्य दिनों के अनुमानित खर्च हैं। दीपोत्सव और दिवाली के दौरान होटल का किराया सामान्य से काफी ज्यादा हो सकता है। इसलिए त्योहार के समय वास्तविक खर्च इससे अधिक भी हो सकता है।

कम खर्च में अयोध्या घूमने के 6 तरीके

1. ट्रेन टिकट पहले बुक करें: दिवाली के समय ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है। यात्रा की तारीख तय होते ही टिकट बुक करने की कोशिश करें।

2. होटल की तुलना करें: केवल मंदिर के पास होटल तलाशने के बजाय फैजाबाद और आसपास के इलाकों के विकल्प भी देखें।

3. स्थानीय परिवहन का इस्तेमाल करें: छोटी दूरी के लिए ई-रिक्शा और साझा परिवहन का विकल्प चुन सकते हैं। इससे निजी टैक्सी के मुकाबले खर्च कम हो सकता है।

4. यात्रा का सामान सीमित रखें: मंदिर में प्रवेश के दौरान सुरक्षा जांच और सामान रखने की व्यवस्था से गुजरना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी सामान ही साथ रखें।

5. खाने का बजट तय करें: स्थानीय भोजनालयों में सामान्य भोजन के विकल्प चुनकर खर्च नियंत्रित किया जा सकता है। पानी और जरूरी दवाइयां साथ रखें।

6. फर्जी दर्शन पास से बचें: राम मंदिर में सामान्य दर्शन निशुल्क हैं। वीआईपी दर्शन या जल्दी प्रवेश दिलाने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को पैसे न दें।

इन बातों का रखें ध्यान

दीपोत्सव के दौरान अयोध्या में भारी भीड़ जुट सकती है। इस वजह से राम मंदिर और सरयू घाट के आसपास वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी या रूट डायवर्जन लागू हो सकता है। कई जगहों पर पार्किंग से आगे पैदल जाना पड़ सकता है।

यात्रा से पहले जिला प्रशासन की ओर से जारी यातायात और सुरक्षा संबंधी निर्देश जरूर देखें। बच्चों और बुजुर्गों के साथ जा रहे हैं तो मिलने के लिए पहले से एक जगह तय कर लें। मोबाइल फोन, बैग और दूसरे सामान को लेकर मंदिर के नियमों की जानकारी भी पहले ले लें।

अयोध्या की दिवाली देखने के लिए महंगे होटल या निजी टैक्सी जरूरी नहीं हैं। सही समय पर टिकट बुकिंग, बजट में ठहरने की व्यवस्था और पहले से तय यात्रा कार्यक्रम के साथ इस धार्मिक यात्रा को कम खर्च में भी यादगार बनाया जा सकता है।