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उदयपुर में यातायात के दबाव को कम करने की हुई ये पहल, 11 मई को खुलेगी आवेदकों की टेक्निकल बीड

उदयपुर . सरकार के दबाव में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस निर्माण से पहले की उलझनों को दूर करने में सक्रिय है।
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उदयपुर

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Madhulika Singh

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Updated: 8 May 2018, 4:43 PM IST

Elevated Road Construction udiapole to court chouraha udaipur

metro train

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर . वक्फ बोर्ड, आरएनटी मेडिकल कॉलेज और प्रभावित व्यापारियों के विरोध के बावजूद उदियापोल से कोर्ट चौराहे तक एलिवेटेड रोड निर्माण का ‘सफर’ थमता नहीं दिख रहा। सरकार के दबाव में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस निर्माण से पहले की उलझनों को दूर करने में सक्रिय है।


भूमि अवाप्ति के नोटिस जारी के बाद एनएचएआई 21 दिन की अवधि पूरी होने की कार्ययोजना बना रहा है। अभी धारा 3(ए) के तहत सार्वजनिक नोटिस चस्पा करने के बाद प्राधिकरण 3(डी) के तहत व्यक्तिश: नोटिस भेजने को तैयार है। इधर, भूमि अवाप्ति को लेकर जिला कलक्टर की ओर से गठित कमेटी ने अधीनस्थ कमेटी में शामिल तहसीलदार सहित अन्य ओहदेदारों को भूमि से जुड़ा विवरण तैयार करने को कहा है।

गौरतलब है कि उदियापोल से कोर्ट चौराहे तक कुल 1.65 किलोमीटर एलिवेटेड रोड की मंजूरी को अनुपयोगी बताते हुए दोनों छोर पर सक्रिय व्यापारी शुरुआत से ही विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं वक्फ बोर्ड मामले को लेकर आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं।


दोनों ओर होगी 7 मीटर की सडक़
डीपीआर के हिसाब से एलिवेटेड रोड पर 14.62 मीटर चौड़ा कॉरिडोर होगा। इसी तरह नीचे न्यूनतम 19.5 से अधिक 30 मीटर तक चौड़ी सडक़ के बीच में दो मीटर गोलाई (परिधि) वाले पिल्लर खड़े होंगे। वहीं पिल्लर को बचाने के लिए .5 मीटर के ब्रेकर लगाए जाएंगे।

इसके दोनों छोर कुल एक से 1.5 मीटर जमीन का उपयोग ड्रेन वाटर की निकासी और यूटिलिटी कॉरिडोर में होगा यानी यूटिलिटी कॉरिडोर में बिजली की लाइनें बिछाने सहित अन्य लाइनों के लिए उपयोग ली जाएगी। एनएचएआई एक्सपर्ट की मानें तो एलिवेटेड रोड की ऊंचाई साढ़े पांच मीटर होगी।


चिंतित हैं व्यापारी
व्यापारी एलिवेटेड रोड को भारतीय रोड कांग्रेस के मानदण्डों से परे बता रहे हैं। साथ ही निर्माण के दौरान एवं फ्लाइओवर पर दुर्घटनाएं होने की आशंकाएं जताई जा रही है। मानदण्डों की कमी को लेकर प्राधिकरण का तर्क है कि योजना को आगामी 40 वर्षों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। मानदण्ड ऐसी जगहों पर रखे जाते हैं, जहां जरूरत पूरी होती है, लेकिन वर्तमान जगह कम होने से मानदण्डों में कमी कर उसे पर्याप्त बनाया जा सकता है।


दोनों ओर टू लेन
प्राधिकरण की मानें तो पिल्लर और यूटिलिटी कॉरिडोर की जगह छोडऩे के बाद दोनों छोर पर करीब 7-7 मीटर सडक़ पर आवागमन रहेगा। व्यापारियों की चिंता है कि इससे उनके संस्थानों के बाहर पार्र्किंग की समस्या गहरा जाएगी। इस पर प्राधिकरण का कहना है कि पिल्लर के ठीक नीचे यातायात नहीं होगा, जो कि पार्र्किंग के काम आएगी। सडक़ मानदण्डों के मुताबिक स्टेट हाइवे पर 5.5 मीटर डामर सडक़ का इंटरमीडिटेड रोड होता है। वहीं 7 मीटर का टू-लेन और 10 मीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग होता है। स्टेट हाइवे मिलने के बाद यातायात जाम की समस्या नहीं रहेगी।


दोनों छोर पर 80-80 मीटर उतार-चढ़ाव
निर्माण प्रक्रिया के तहत उदियापोल और कोर्ट चौराहे की ओर एलिवेटेड रोड पर ढलान तैयार कर 80-80 मीटर तक चढ़ाव व उतार बनाया जाएगा। इस हिस्से में दीवार बनाई जाएगी, जबकि बीच का पूरा हिस्सा पिल्लर पर होगा। पिल्लर के नीचे की ओर वाहनों के टकराव को रोकने के लिए प्लांट एवं हरियाली के लिए डिवाइडरनुमा निर्माण होगा।
&उदयपुर के भविष्य के लिए एलिवेटेड रोड का निर्माण फायदेमंद रहेगा। बीकानेर में भी निर्माण कार्य जारी है, जबकि अजमेर जैसी संकरी जगह पर निजी एजेंसी की ओर से इसी तरह का रोड बनाया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि कम जगह में बेहतर निर्माण कर लोगों को राहत दी जाए।
सुनील यादव, प्रबंध निदेशक, एनएचएआई


प्राधिकरण ने आपत्तियां की खारिज

एक सवाल बार-बार उठ रहा था कि डीपीआर बनाने वाली दिल्ली की फर्म आइसीटी और वर्तमान में प्राधिकरण के अधीन सेवारत अभियंताओं को एलिवेटेड रोड निर्माण का अनुभव नहीं है। प्राधिकरण ने इसे खारिज करते हुए बताया कि आइसीटी देश में एलिवेटेड सडक़ निर्माण में सबसे पुरानी और अनुभवी कम्पनी है। प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक को भी बाड़मेर शहर के बीच निकल रहे 6 लेन पर सिंगल स्पान पर करीब 360 मीटर लंबा फ्लाइओवर बनाने का अनुभव है। प्राधिकरण ने उस बात को भी खारिज किया कि डीपीआर बनाने से पहले निजी कंपनी ने ओडी (ऑरिजन एवं डेस्टिनेशन) सर्वे नहीं किया गया है।