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बॉक्सर बेटी ने सोना-चांदी जीतकर गाड़े झंडे, तो मां अब रैफरी बनकर कमा रहीं नाम

उदयपुर की ताश्री मेनारिया ने हाल ही बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण, मां प्रगति ने बेटी के लिए सीखा गेम और कड़ी मेहनत से पहुंची रैफरी के मुकाम तक
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मधुलिका सिंह/उदयपुर . पांच साल की उम्र से ताश्री ने बॉक्सिंग ग्लव्स हाथ में पहन कर इसकी ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी और आज वो गोल्ड मेडल जीतकर बॉक्सिंग में झंडे गाड़ रही हैं। हाल ही भोपाल में हुई राष्ट्रीय स्कूल अंडर 19 चैंपियनशिप में उदयपुर की ताश्री मेनारिया ने हैवी वेट वर्ग में हिमाचल प्रदेश की बॉक्सर वंशिका को हराते हुए स्वर्ण पर कब्ज़ा किया। ताश्री अब तक कई स्पद्धार्धाओं में हिस्सा लेकर मेडल्स जीत चुकी। इस सफर में हमसफर उसकी मां प्रगति मेनारिया रही। जिन्होंने कदम-कदम पर बेटी का साथ दिया। बेटी के लिए खुद पहलेे खिलाड़ी बनीं तो अब रैफरी बनकर वे निर्देश देती हैं।

8 साल की उम्र में ताश्री ने बचाई बच्चे की जान, मिला ब्रेवरी अवार्ड

मां प्रगति मेनारिया ने बताया कि ताश्री अभी उदयपुर के गुरुनानक स्कूल की 12वीं की छात्रा हैं। उन्होंने पांच साल की उम्र से उसको बॉक्सिंग, जूडो-कराते सिखाए। 8 साल की उम्र में एक बच्चे की जान बचाने पर उसे ब्रेवरी अवार्ड मिला। ताश्री सुबह 5 से 8 बजे तक और शाम 4 से 8 बजे तक प्रेक्टिस करती हैं। बॉक्सिंग के साथ उसने तलवारबाजी, मुदगर चलाना भी सीखा। अब उसे जल्द ही कराते में ब्लैक बेल्ट मिलने की उम्मीद है।

बेटी के लिए पहले खिलाड़ी बनीं और अब रैफरी

प्रगति ने बताया कि उन्होंने बेटी के लिए खुद कराते सीखा ताकि बेटी का इसके प्रति लगाव बढ़े। ताश्री के साथ वे खुद भी प्लेयर बन गई और कराते में सिल्वर मेडल जीता तो किक बॉक्सिंग में सिल्वर मेडल। कुछ समय पहले ही राजस्थान बॉक्सिंग एसोसिएशन की रैफरी जज की परीक्षा दी। इसमें वे चयनित हो गई। अब वे राज्य स्तरीय मुक्केबाजी प्रतियोगिताओं में रैफरी की भूमिका निभाएंगी। ताश्री के पिता सुनील कुमार सेना में थे। अब अर्ली रिटायरमेंट लेकर बेटी को सपोर्ट करते हैं। सेना में उनका गेम भी बॉक्सिंग ही था। ऐसे में बेटी को सिखाने में वे भी पूरा सहयोग करते हैं।