5 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

उदयपुर : बलीचा तिराहाः रॉन्ग साइड एंट्री से मुक्ति, एलिप्टिकल सर्कल से सुधरेगा ट्रैफिक सिस्टम

बलीचा तिराहे की 6.81 करोड़ रुपए की लागत से री-इंजीनियरिंग चल रही है। नए डिजाइन में करीब 200×150 फीट का एलिप्टिकल सर्कल और मीडियन बनाए जा रहे हैं, जिससे वाहनों की दिशा तय होगी और रॉन्ग साइड से चौराहा पार करने की समस्या कम होगी। ड्रेनेज नाला और उसकी वॉल का काम पूरा हो चुका है, जबकि सड़क निर्माण व डामरीकरण बाकी है। 15 नवंबर 2025 से शुरू काम करीब 30 प्रतिशत पूरा हुआ है।
2 min read
Google source verification
balicha tiraha

पूर्व में बना बलीचा तिराहा 

उदयपुर. शहर के प्रवेश द्वारों में शामिल बलीचा तिराहा अब सिर्फ चौड़ा नहीं होगा, बल्कि वहां का पूरा ट्रैफि

/क सिस्टम बदला जाएगा। लंबे समय से दुर्घटना की आशंका वाले इस जंक्शन की तकनीकी खामियां दूर कर इसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने का काम चल रहा है। री-इंजीनियरिंग के बाद वाहनों को तय दिशा में चलने के लिए बेहतर मार्ग मिलेगा और रॉन्ग साइड से चौराहा पार करने की समस्या भी काफी हद तक कम होगी।

उदयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के तहत बलीचा तिराहे की री-इंजीनियरिंग कराई जा रही है। करीब 6.81 करोड़ रुपए के इस काम की शुरुआत 15 नवंबर 2025 को हुई थी। इसे सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अभी सिर्फ 30 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। अब सड़क निर्माण और डामरीकरण सहित बाकी काम किया जाना है।

अब नए डिजाइन से सुधार

बलीचा तिराहा पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन था। 9 जुलाई 2024 को यह प्राधिकरण को हस्तांतरित हुआ। वहां अहमदाबाद रोड और प्रतापनगर-एकलिंगपुरा की तरफ से आने वाला यातायात एक ही जंक्शन पर मिलता है। वाहनों की अधिक आवाजाही और मौजूदा डिजाइन के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। कई बार वाहन चालक कम दूरी के लिए रॉन्ग साइड का सहारा लेते थे। इसी समस्या को देखते हुए डीपीआर तैयार कर जंक्शन का नया डिजाइन तैयार किया गया है। अब वहां करीब 200 बाई 150 फीट का एलिप्टिकल सर्कल बन रहा है। इसके चारों तरफ मीडियन बनाए जा रहे है ताकि वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित किया जा सके और मनमाने तरीके से कट लेने की गुंजाइश कम हो।

नाला बन गया, मिट्टी-गिट्टी डली

मौके पर काम अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। ड्रेनेज के लिए नाले का निर्माण और उसकी वॉल का काम पूरा हो चुका है। स्लैब कवरिंग के लिए शटरिंग का काम चल रहा है। चौराहे को चौड़ा करने के लिए मिट्टी और गिट्टी भी डाली जा चुकी है।

अब मुख्य रूप से सड़क निर्माण और डामरीकरण का काम बाकी है। यूडीए अधिकारियों ने बताया कि मौके पर करीब 1.60 करोड़ रुपए का काम भौतिक रूप से हो चुका है, जबकि ठेकेदार को करीब 1 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।

दुर्घटना के साथ ट्रैफिक जाम से भी मिलेगी राहत

री-इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अहमदाबाद रोड से शहर की ओर आने और शहर से बाहर जाने वाले वाहनों को अधिक व्यवस्थित रास्ता मिलेगा। मीडियन और नए सर्कल के कारण वाहनों की दिशा स्पष्ट होगी। इससे रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों पर अंकुश लगेगा और भिड़ंत की आशंका घटेगी। साथ ही बारिश के दौरान पानी निकासी के लिए नया ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जा रहा है। सड़क चौड़ी होने और जंक्शन का नया स्वरूप तैयार होने के बाद यातायात का दबाव भी बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।