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महाकाल मंदिर में अब फोटोग्राफी करने वालों को यह पहनना होगा…

सेवकों को अनिवार्य तौर पर ड्रेस पहनकर आने के निर्देश, कार्रवाई की चेतावनी
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उज्जैन

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Lalit Saxena

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Updated: 24 May 2018, 8:01 AM IST

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उज्जैन. महाकाल मंदिर में प्रबंध समिति से अनुमति लेकर फोटोग्राफी करने वाले कैमरोमनों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया गया। इसके अलावा मंदिर के सभी सेवकों को निर्धारित ड्रेस पहनकर आने के निर्देश दिए गए हैं। नियम- निर्देश का पालन नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
महाकाल मंदिर में प्रबंध समिति से वार्षिक अनुबंध के आधार पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को तय दर के अनुसार फोटो निकालकर देने के लिए फोटोग्राफरों को अनुमति प्रदान की है। इन फोटोग्राफरों की अलग से पहचान के लिए डे्रस कोड लागू किया गया है। फोटोग्राफरों को नेवी ब्लू पेंट और सफेद शर्ट पहनकर आने पर ही मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।
अपने खर्च पर लेकर आएं डे्रस
महाकाल मंदिर में कार्यरत सेवकों के लिए ड्रेस कोड तय है। सभी सेवकों को ड्रेस पहनकर आना अनिवार्य है। कुछ दिनों से अनेक सेवक तय ड्रेस में नहीं आ रहे थे। निरीक्षण में यह बात सामने आने पर कलेक्टर ने सेवकों से जानकारी ली,तो सेवकों ने बताया कि डे्रस मंदिर समिति द्वारा प्रदान की जाती है। दो वर्ष से समिति की ओर डे्रस नहीं दी गई है। कलेक्टर ने कहा समिति ने नहीं दी तो कोई बात नहीं, आप अपने खर्च से ड्रेस लें और उसे पहनकर ही मंदिर आएं। तय डे्रस नहीं पहनकर आने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
व्यास कार्य से मुक्त, तिवारी को प्रभार
महाकाल मंदिर में आंशिक बदलाव किया गया है। कलेक्टर मनीष सिंह ने कार्य सुविधा की दृष्टि से मंदिर में सहायक प्रशासक के तौर पर पदस्थ सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख सतीश व्यास को महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अतिरिक्त कार्य से मुक्त कर दिया है। व्यास को पूर्णकालिक प्रधान पाठक पटवारी प्रशिक्षण शाला लालपुर में कार्य करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। व्यास के पास महाकालेश्वर मन्दिर समिति के जो प्रभार थे, वे सहायक प्रशासनिक अधिकारी आरके तिवारी को सौंप दिए गए हैं।
प्रवेश के लिए दबाव-प्रभाव जारी
उज्जैन ञ्च पत्रिका. महाकाल मंदिर में तमाम प्रयासों के बाद भी प्रवेश के लिए दबाव- प्रभाव का जोर जारी है। इसें लेकर बुधावर को दो विवाद भी सामने आए हैं। बताया जाता है कि कार्तिकेय मंडपम की डिजाइन पर आपत्ति आने के बाद एक हिन्दूवादी संगठन के कार्यकर्ता करीब १.३० बजे महाकाल मंदिर पहुंचे थे और डिजाइन देखने के पुलिस चौकी के डी गेट से मंदिर में जाना चाहते थे। गेट पर सेवक द्वारा रोके जाने पर विवाद हो गया। इस बीच किसी कार्यकर्ता ने अपने पदाधिकारी से मंदिर के सेवक की फोन पर चर्चा करा दी। इसके बाद सभी को मंदिर में प्रवेश दे दिया गया। इसके अलावा वीआइपी होने का हवाला देकर जाने की बात पर महिला का विवाद हुआ। बताया जाता है कि महिला अपने साथ आने वाले सभी लोगों के साथ डी गेट से मंदिर में प्रवेश चाहती थी। मंदिर के अधिकारियों ने इसके लिए अनुमति पर्ची बनाने को कहा तो विवाद हो गया। अन्य लोगों के हस्तक्षेप से मामला शांत किया गया।