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Ujjain Diwali News : लक्ष्मीजी के साथ उल्लू और छिपकली का क्या है कनेक्शन? जानिए खास वजह

Ujjain Diwali News : खील-बताशे, सिंघाड़े तक पूजा की थाली में क्यों सजते हैं? राम आगमन पर लक्ष्मी पूजन... धर्म संग समृद्धि, प्रो. शिवशंकर मिश्र व प्रो. शोभा मिश्रा ने समझाया महत्व
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उज्जैन

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deepak deewan

•

Updated: 8 Nov 2026, 11:20 AM IST

उल्लू और छिपकली का माता लक्ष्मी से खास कनेक्शन

उल्लू और छिपकली का माता लक्ष्मी से खास कनेक्शन- image AI

Ujjain Diwali News : जब युवा पीढ़ी पूछती है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाने वाली दिवाली पर लक्ष्मीजी की पूजा क्यों होती है? गणेश- सरस्वती क्यों साथ बैठते हैं? या उल्लू-छिपकली जैसे जीवों को शुभ मानने के पीछे क्या तर्क हैं?… तो इनका जवाब सिर्फ परंपराओं के पालन में नहीं, बल्कि गहरी जीवन-पद्धति में छिपा है। दिवाली की परंपराएं महज धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का दर्शन भी हैं। संदेश है कि धन के साथ विवेक, समृद्धि के साथ मर्यादा, बाहरी स्वच्छता के साथ मन की शुद्धता और उत्सव के साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है। ऐसी जिज्ञासाओं के जवाब पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र और माधव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की दर्शनशास्त्र विभाग की प्रो. शोभा मिश्रा ने धर्म और दर्शन के आधार पर दिए हैं।

श्रीराम के स्वागत में लक्ष्मी पूजन का क्या कनेक्शन है?

धार्मिक पक्ष: वनवास से श्रीराम के अयोध्या लौटने पर लोगों ने दीप जलाकर नगरी को रोशन किया था। दूसरी मान्यता के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस को समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था, इसीलिए लक्ष्मी पूजन होता है।
दार्शनिक पक्ष: श्रीराम का आगमन धर्म की विजय, मर्यादा की पुनस्र्थापना का प्रतीक है। लक्ष्मी पूजन समृद्धि की कामना है। संदेश है कि धन-वैभव तभी सार्थक हैं, जब उनका अर्जन धर्मसम्मत हो।

लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी और सरस्वती का पूजन क्यों?

धार्मिक पक्ष: मां लक्ष्मी धन-ऐश्वर्य, गणेशजी बुद्धि, मां सरस्वती ज्ञान-विद्या की अधिष्ठात्री हैं। एक कथा के अनुसार लक्ष्मीजी की मातृत्व इच्छा पर माता पार्वती ने गणेशजी को उनका मानस पुत्र बनाने का आशीर्वाद दिया था।
दार्शनिक पक्ष: धन के सदुपयोग का ज्ञान न हो तो वह विनाश का कारण बन सकता है। ज्ञान के साथ सही निर्णय लेने की बुद्धि जरूरी है। इसीलिए धन, ज्ञान, विवेक का संतुलन होना चाहिए।

लक्ष्मी आगमन से पहले घर की सफाई क्यों की जाती है?

धार्मिक पक्ष: मां लक्ष्मी को स्वच्छता, पवित्रता और शुभता से जुड़ा माना जाता है। इसीलिए दिवाली से पहले घरों की विशेष साफ-सफाई होती है। मान्यता है कि स्वच्छ वातावरण में माता लक्ष्मी का वास होता है।
दार्शनिक पक्ष: सफाई का अर्थ मन को भी निर्मल बनाना है। जैसे अनुपयोगी वस्तुएं हटाई जाती हैं, उसी तरह द्वेष, अहंकार और नकारात्मक विचारों को दूर करना भी जरूरी है।

धानी, बताशे, गन्ना, कमल और सिंघाड़ा क्यों चढ़ाते हैं?

धार्मिक पक्ष: धान से बनी धानी या खील अन्न संपन्नता, बताशे मिठास और गन्ना रस कृषि समृद्धि का प्रतीक हैं। कमल मां लक्ष्मी का आसन माना जाता है। सिंघाड़ा जल में पैदा होने वाला मौसमी फल है। इनका पूजन में विशेष महत्व है। दार्शनिक पक्ष: ये सामग्रियां अन्न, जल, भूमि, कृषि का महत्व बताती हैं। कमल प्रतिकूल हालात में भी पवित्रता बनाए रखने की प्रेरणा देता है… प्रकृति-अन्नदाता के श्रम से भी समृद्धि आती है।

जीवों के पूजन से जुड़ी मान्यता के पीछे क्या वजह है?

धार्मिक पक्ष: मां लक्ष्मी के वाहन उल्लू के दर्शन को शुभ संकेत समझा जाता है। नीलकंठ का संबंध भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है। कुछ क्षेत्रों में छिपकली के दर्शन को भी शकुन से जोड़ा जाता है।
दार्शनिक पक्ष: इन मान्यताओं में जीव- जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी है। उल्लू चूहों, नीलकंठ कीट-पतंगों और छिपकली छोटे कीट खाकर पारिस्थितिकी संतुलन में योगदान देते हैं।