
Amit Shah
वाराणसी. सपा व बसपा गठबंधन से परेशान बीजेपी अपनी रणनीति बदल सकती है। यूपी सरकार के कार्यप्रणाली के चलते बीजेपी का सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला फेल होने लगा है जिसके चलते ही भगवा दल ने नयी योजना पर काम करना शुरू कर दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जब सहयोगी दलो से वार्ता की थी तो उसकी बाद से ही यह कयास लगने लगे हैं।
यह भी पढ़े:-इस मंदिर में दर्शन करने जाना चाहता था गैंगरेप का आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, पहले ही हुआ गिरफ्तार
बीजेपी को सबसे बड़ा झटका गोरखपुर व फूलपुर चुनाव में मिली हार से हुआ था जिस तरह से सपा व बसपा गठबंधन ने निषाद व पटेल प्रत्याशी को जीता कर बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को चुनौती दी है उससे भाजपा बहुत परेशान है। राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने सहयोगी दल सुभासपा व अपना दल को एक सीट नहीं दी थी। अपना दल ने गठबंधन धर्म निभाते हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी को जिताया था जबकि सुभासपा के दो विधायक पर क्रास वोटिंग का आरोप लग गया था बीजेपी की निगाहे अब विधान परिषद चुनाव पर टिक गयी है जहां पर दो सीट सहयोगी दलों को मिल सकती है।
यह भी पढ़े:-सीएम योगी सरकार में हुए उन्नाव कांड के चलते बढ़ी पीएम मोदी की परेशानी, सहयोगी दलों को होगा लाभ
अपना दल (सोनेलाल) व सुभासपा को मिल सकती है एक-एक सीट
सूत्रों की माने तो अपना दल (सोनेलाल) व सुभासपा को एक-एक सीट मिल सकती है। यदि ऐसा होता है तो केन्द्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के पति आशीष पटेल व सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर विधान परिषद में पहुंच सकते हैं। बीजेपी ने इस संदर्भ में अधिकृत रुप से कुछ नहीं कहा है लेकिन इसकी तैयारी शुरू हो गयी है। बीजेपी के लिए सबसे बड़ा चुनाव लोकसभा 2019 है। पीएम नरेन्द्र मोदी को फिर से पीएम बनाने के लिए सहयोगी दलों का साथ बहुत जरूरी है। ऐसे में सहयोगी दलों को विधान परिषद में भेजने से भगवा पार्टी का गठबंधन मजबूत हो जायेगा।
यह भी पढ़े:-बीजेपी के ब्राह्मण विधायक ने खोली सीएम योगी की पोल, कहा भ्रष्टाचार की शिकायत करने पर पार्टी छोडऩे को कहा जाता है
विधान परिषद चुनाव में भी बीजेपी करा सकती है क्रास वोटिंग
सूत्रों की माने तो राज्यसभा चुनाव 2018की तरह विधान परिषद चुनाव में भी बीजेपी विरोधी दलों के विधायक से अपने पक्ष में क्रास वोटिंग कर सकती है। 29 अप्रैल को होने वाले विधान परिषद चुनाव में बीजेपी व सहयोगी दलों के विधायकों की संख्या 324 है इसमे सपा, बसपा व आरएलडी व निर्दलीय विधायकों की संख्या जोड़ दी जाये तो यह 331 हो जायेगी। ऐसे में बीजेपी के लिए 10 प्रत्याशी जितना बेहद आसान है जबकि सपा व बसपा भी एक-एक प्रत्याशी को मिल कर विधान परिषद में पहुंचा देंगे। बीजेपी के पास अतिरिक्त 21 वोट बच रहा है और बीजेपी राज्यसभा की तरह 11 वां प्रत्याशी भी उतार देती है तो लड़ाई बेहद रोमांचक हो जायेगी। बीजेपी को अपने अतिरिक्त प्रत्याशी को जिताने के लिए 11 वोटों की जरूरत है ऐसे में राज्यसभा चुनाव की तरह प्रथम व द्वित्ीय वरीयता का वोट महत्वपूर्ण होगा। अब देखना है कि बीजेपी किस तरह से सहयोगी दलों के साथ सीट बांटती है।
यह भी पढ़े:-अखिलेश पर आरोप लगाने वाली सीएम योगी सरकार पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, खुल गयी बीजेपी की कलई
Published on:
14 Apr 2018, 1:55 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.