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बीजेपी ने ओमप्रकाश राजभर को दिया तगड़ा झटका, नहीं काम आया सुभासपा का दबाव

कसभा चुनाव 2019 में दिखेगा असर, सुभासपा ने लंबे समय से बनाया हुआ था दबाव
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वाराणसी

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Devesh Singh

•

Updated: 5 May 2018, 5:27 PM IST

Om Prakash Rajbhar and Amit Shah

Om Prakash Rajbhar and Amit Shah

वाराणसी. बीजेपी ने अपने सहयोगी दल सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को तगड़ा झटका दे दिया है। सुभासपा ने लंबे समय तक बीजेपी पर दबाव बनाया हुआ था लेकिन कोई दबाव काम नहीं आया है। इसका असर लोकसभा चुनाव 2019 पर भी पड़ सकता है लेकिन इतना तो साफ है कि फिलहाल बीजेपी इस मांग को मानने को तैयार नहीं है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ व कैबिनेट मंत्री के तल्ख रिश्ते किसी से छिपे नहीं है। ओमप्रकाश राजभर को जब भी मौका मिलता है वह यूपी सरकार पर हमला बोलते हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में ही ओमप्रकाश राजभर ने यूपी में शराबबंदी की मांग को पूरी करने की बात कही थी। ओमप्रकाश राजभर ने कहा था कि सुभासपा की महिला विंग पिछले १५ साल से शराबबंदी की मांग करती आयी है। सत्ता में नहीं होने के चलते हमारी बात नहीं सुनी जाती थी लेकिन अब हमारी सत्ता में हिस्सेदारी है इसलिए यूपी में शराब बंदी होनी चाहिए। ओमप्रकाश राजभर ने कहा था कि यूपी सरकार हमारी मांग नहीं मानती है तो जनता खुद ही यह आवाज उठायेगी और सरकार को झुकना पड़ेगा। ओमप्रकाश राजभर काफी समय से यूपी सरकार से शराब बंदी की मांग कर रहे हैं। बीजेपी ने ओमप्रकाश राजभर को तगड़ा झटका देते हुए शराब बंदी की मांग को खारिज कर दिया है। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने आजमगढ़ में स्पष्ट कर दिया है कि अभी यूपी सरकार का शराब बंदी करने का इरादा नहीं है। ओमप्रकाश राजभर सरकार में शामिल है और एक पार्टी के नेता भी है ऐसे में शराब बंदी उनका व्यक्तिगत अभियान है।
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शराब बंदी से यूपी सरकार को लगेगा हजारों करोड़ का झटका
बीजेपी का शराब बंदी नहीं करने के पीछे मुख्य कारण हजारों करोड़ रुपये का राजस्व है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही किसानों का एक लाख तक का कर्ज माफ किया है जिसमे सरकार के हजारों करोड़ रुपये गये हैं। छात्रों को अभी लैपटाप वितरित करना है। इसके अतिरिक्त लोकसभा चुनाव 2019 के पहले यूपी का विकास करके दिखाना है जिसके लिए भी हजारों करोड़ रुपये की जरूरत होगी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी चुनाव में प्रदेश को बीमारु राज्य घोषित किया था और आरोप लगाया था कि अखिलेश यादव व मायावती की सरकार ने प्रदेश को बर्बाद कर दिया है उद्योग खत्म हो चुके हैं। राजनीति के आरोपों को छोड़ दिया जाये तो यह सही है कि यूपी में आधारभूत सुविधाओं का सख्त आभाव है जिसके चलते प्रदेश की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। ऐसे में सीएम योगी सरकार शराब बंदी करके बड़ा आर्थिक रिस्क नहीं लेना चाहती है।
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