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मुख्य अभियंता के सस्पेंड होने का नहीं हुआ असर, वरूणा कॉरीडोर के काम में नहीं आयी तेजी

सीएम योगी आदित्यनाथ की नहीं दिख रही हनक, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 6 Dec 2017, 5:18 PM IST

 वरूणा कॉरीडोर

Varuna Corridor

वाराणसी. सपा सरकार के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट वरूणा कॉरीडोर को लेकर बेहद लापरवाही बरती जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी जिस प्रोजेक्ट को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है उसको लेकर भी अधिकारी गंभीर नहीं है। प्रदेश सरकार ने वरूणा कॉरीडोर में लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्य अभियंता को सस्पेंड कर दिया है इसके बाद भी काम की सुस्ती खत्म नहीं हुई है।
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वरूणा व चौकाघाट पुल के बगल में बन रहे वरूणा कॉरीडोर की बात की जाये तो यहां पर निर्माण कार्य ठप पड़ा है। ड्रेजिंग करने वाली करोड़ों की क्रेन वैसे ही धूल फांक रही है। वरूणा पुल के पास बने रहे कॉरीडोर के पास लगाये गये पौधे तक बिना पानी को सूखने के कगार पर पहुंच गयी है। वरूणा नदी की स्थिति तो बेहद खराब हो चुकी है। नदी में साफ पानी की जगह सीवर बहता है और इस समय नदी का एक बड़ा हिस्सा सूखा पड़ा है और जगह-जगह पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। माना जा रहा है कि प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चन्द्रा द्वारा कमिश्रर नितिन रमेश गोकर्ण की रिपोर्ट मिलने के बाद सस्पेंड किये गये मुख्य अभियंता (सोन) सुरेश चन्द्र शर्मा की स्थिति देख कर अन्य अधिकारियों को सबक मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अधिकारी पहले से ही निलंबन को सजा नहीं मानते हैं इसलिए सरकार की कार्रवाई बेअसर साबित हुई है और वरूणा कॉरीडोर के नाम पर जनता का करोड़ों रुपये बर्बाद होने के कगार पर पहुंच चुका है।
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60 प्रतिशत बजट देने के बाद भी हुआ है 40 प्रतिशत काम
वरूणा कॉरीडोर के लिए 201 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई थी, जिससे डीएम बंगले के पीछे से लेकर 11.3 किलोमीटर की दूरी तक कॉरीडोर का निर्माण होना है। 10.3 किलोमीटर के दायरे में ग्रीन बेल्ट का विकास भी किया जाना है। इसके अतिरिक्त पाथवे, हाईमास्ट, पक्के घाट आदि का निर्माण किया जाना बाकी है। यूपी सरकार ने कुल बजट का 60 प्रतिशत की धनराशि जारी की है, लेकिन सिर्फ 40 प्रतिशत ही काम हुआ है। वरूणा कॉरीडोर का निर्माण करने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को मिली है और सिंचाई विभाग ने कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को बनाया है। यूपीपीसीएल ने विभाग से और बजट देने की मांग की है, जो नहीं मिलने पर काम रोक दिया गया है। चर्चाओं की माने तो सपा सरकार में बजट का जमकर बंदरबाट किया गया है। वरूणा कॉरीडोर से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि सपा सरकार फिर से सत्ता में वापसी करेगी। इसके चलते गड़बड़ी पकड़ में नहीं आयेगी। सपा सरकार की वापसी नहीं होने के बाद से अधिकारियों ने वरूणा कॉरीडोर का निर्माण रोक दिया है। चर्चा है कि कॉरीडोर के निर्माण के लिए आया पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है इसलिए अब निर्माण होना कठिन हो गया है। अब देखना है कि मुख्य अभियंता के निलंबित होने के बाद भी काम नहीं शुरू होने पर सीएम योगी आदित्यनाथ क्या एक्शन लेते हैं।
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