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वर्षों बाद गंगा दशहरा में बन रहा खास संयोग, पितरों के लिए लगायी गयी डुबकी बदल देगी भाग्य

जन्मों के पापों से मिल जाती है मुक्ति, जानिए कैसे खास बनाये अपना गंगा दशहरा
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वाराणसी

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Devesh Singh

•

Updated: 22 May 2018, 3:59 PM IST

Ganga dussehra 2018

Ganga dussehra 2018

वाराणसी. गंगा दशहरा को बहुत धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भागीरथी की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। प्रत्येक साल की ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन ही गंगा धरती पर आयी थी इसलिए इस दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस बार गंगा दशहरा 24 मई को है। खास संजोग पडऩे के कारण इस साल का गंगा दशहरा बेहद खास बन गया है। आपकी एक डुबकी जन्मों के पापों से मुक्ति दिला सकती है।
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गंगा आज इतनी अधिक प्रदूषित हो गयी है कि अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है। गंगा में इतना प्रदूषण होने के बाद भी गंगा जल में कीड़े नहीं पड़ते हैं इससे पता चलता है कि मोक्षदायिनी मां गंगा आज भी हमारे पापों को हर रही है। भगवान शिव की जटा से बहने वाली मां गंगा के बिना मानव जीवन की कल्पना तक नहीं हो सकती है। सुख व दु:ख दोनों में भी हमें मां गंगा ही सहारा देती है। ऐसे में गंगा दशहरा के दिन बेहद खास होता है। यह दिन ऐसा होता है कि आप अपने पापों की मुक्ति के लिए मोक्षदायिनी में डुबकी लगा सकते हैं।
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गंगा दशहरा पर पड़ रहा खास संयोग
इस बार का गंगा दशहरा खास फल देने वाला है। गर करण, वृषस्थ सूर्य व कन्या का चन्द्र होने के चलते इस बार गंगा दशहरा में नहाने पर अधिक लाभ मिलेगा। साथ ही शाम को हस्त्र नक्षत्र लग रहा है। हस्त्र नक्षत्र में ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी के दिन ही मां गंगा धरती पर आयी थी। इसके अतिरिक्त मलमास होने के चलते भी गंगा दशहरा का महत्व और बढ़ गया है। यदि आप किसी कारण से गंगा में स्नान नहीं कर पाते हैं तो पास की किसी भी पवित्र नदी मेें स्नान कर मां गंगा से अपने पापों की मुक्ति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। गंगा दशहरा के दिन व्रत रहते हुए स्नान करना चाहिए। इसके बाद शिव को गंगा जल अर्पित करके दान करने से दस पापों से मुक्ति मिलती है। इस दस तरह के पाप में शारीरिक, मानसिक व भौतिक पाप शामिल रहते हैं।
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ऐसे करें मां गंगा की पूजा
गंगा दशहरा के दिन सूर्याेदय के समय मां गंगा में स्नान करना चाहिए। स्नान करने से पहले हाथ जोड़ कर मन से ऊं नमह शिवाये नारायनये दशहराये गंगाये नमह का कम से कम दस बार जाप करें। इसके बाद फूल को नदी में आर्पित करें। स्नान करने के बाद मां गंगा से पापों की मुक्ति के लिए प्रार्थना करें और एक दीपक जला कर गंगा में छोड़ दे।
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गंगा में लगायी गयी एक डुबकी से पितरों को मिलेगी शांति
धार्मिक मान्याताओं के अनुसार यदि पितरों का सही ढंग से तर्पण नहीं किया गया है तो वह प्रेत योनि में जा सकते हैं यदि ऐसा हुआ तो जीवन में कभी भी सफलता नहीं मिलेगी। साथ ही वंश वृद्धि तक रुक सकती है। पितरों को प्रसन्न कर मोक्ष दिलाने में गंगा दशहरा बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पितरो की शांति की प्रार्थना करते हुए गंगा दशहरा में लगायी गयी एक डुबकी से भी पितर प्रसन्न हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष मिल जाता है तो वह जाते समय आशीर्वाद देकर जाते हैं जिससे जीवन में सुख व समृद्धि मिलने लगती है।
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