17 जून 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गंज शहिदा मस्जिद को लेकर गहराया विवाद, मुस्लिम पक्ष बोला- काशी रेलवे स्टेशन से पहले हुआ निर्माण

Kashi railway station development work। Varanasi mosque demolition : रेल प्रशासन ने गंज शहिदा मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए रेल प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष खुलकर सामने आया है और कहा है कि मस्जिद का निर्माण रेलवे की जमीन पर नहीं हुआ है।

3 min read
Google source verification
Kashi railway station development work

गंज शहिदा मस्जिद, Pc- Patrika

Mosque Demolition Kashi Railway station :काशी रेलवे स्टेशन को मॉडल रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किए जाने को लेकर रेलवे प्रशासन युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है। इसी को लेकर रेलवे प्रशासन अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने में लगा हुआ है। इसी बीच एक और मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए रेल प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष खुलकर सामने आया है और कहा है कि मस्जिद का निर्माण रेलवे की जमीन पर नहीं हुआ है। मस्जिद तक की है, जब काशी रेलवे स्टेशन का निर्माण ही नहीं हुआ था। ऐसे में विवाद गहराता हुआ नजर आ रहा है।

मस्जिद कमेटी ने भी चस्पा किया जवाब

काशी रेलवे स्टेशन के पास स्थित गंज शहिदा मस्जिद को लेकर अब विवाद बढ़ने लगा है। रेलवे प्रशासन ने 20 जून तक मस्जिद को खाली करने का समय दिया है। उसके बाद इसके ध्वस्तिकरण की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मस्जिद को अवैध बताते हुए परिसर में नोटिस भी चस्पा किया गया है। रेलवे प्रशासन के नोटिस के जवाब में मसाजिद कमेटी ने नोटिस के बगल में ही अपना जवाब भी चिपका दिया है। मसाजिद कमेटी की दलील है कि मस्जिद का काशी रेलवे स्टेशन के पहले ही निर्माण किया गया था।

अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने बताया कि इस मस्जिद का पूरा कार्यभार कमेटी देखती है। उन्होंने कहा कि रेलवे प्रशासन की ओर से उन्हें किसी भी तरह का नोटिस नहीं दिया गया है। हालांकि, इस बात की जानकारी हुई है की मस्जिद परिसर में नोटिस चस्पा किया गया है। उन्होंने नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस नोटिस पर किसी भी सक्षम अधिकारी के ना तो हस्ताक्षर है ना ही सील लगी है। ऐसे में इस तरह के नोटिस का जवाब देना कमेटी उचित नहीं समझती।

1883 में मस्जिद और 1887 में हुआ स्टेशन का निर्माण

एसएम यासीन के मुताबिक, गंज शहिदा मस्जिद की नीव 1034 ई में रखी गई थी। इस मस्जिद के परिसर में कब्रिस्तान और मजार का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि कमेटी के पास 1883-84 का बंदोबस्ती नक्शा भी मौजूद है और इस नशे में मस्जिद साफ-साफ दिख रही है और कमेटी के पास अटेस्टेड कॉपी भी मौजूद है। ऐसे में रेलवे द्वारा इसे अपनी जमीन बताया जाना कहीं से भी उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि मस्जिद का निर्माण 1883-84 ई मैं हुआ था, जबकि रेलवे स्टेशन का निर्माण 1887 में हुआ, ऐसे में यह रेलवे की जमीन कैसे हो सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रेल प्रसाद जानबूझकर मस्जिद को अपने जमीन पर अतिक्रमण बता रहा है। उन्होंने कहा कि मस्जिद की जमीन पर कभी कोई केस लड़ा ही नहीं गया। कोर्ट में जो मुकदमा लड़ा गया था, वह मस्जिद के बगल की जमीन थी और उसमें भी हार नहीं मिली थी, बल्कि पैरवी नहीं किए जाने की वजह से कोर्ट ने मुकदमे को खारिज कर दिया था। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण को लेकर वह हाईकोर्ट का रुख करेंगे और रेलवे प्रशासन के नोटिस को चैलेंज किया जाएगा। मस्जिद और मस्जिद में स्थित मजार किसी भी तरह से अवैध नहीं हैं।

क्या है मामला

दरअसल, काशी रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करके एक मॉडल स्टेशन के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां एक ही स्थान से बस, ट्रेन और हेलीकॉप्टर की सुविधा मिलेगी, जिसको लेकर अतिक्रमण की गई जमीन पर शासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले अजगैब शहीद मस्जिद को बुलडोजर की मदद से गिराया गया था, जिसके बाद अब शहिदा मस्जिद को गिराने को लेकर रेल प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। मस्जिद के बाहर नोटिस चस्पा कर बताया गया है कि 20 जून तक इस खाली कर दें। इसी को लेकर विवाद गहरा रहा है।

बड़ी खबरें

View All

वाराणसी

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग