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अपना दल में दूसरी बार हुई है टूट, लोकसभा चुनाव में पटेल वोटरों को साधना होगा कठिन

अपना दल से सांसद रहे कुंवर हरिवंश सिंह ने बनायी है नयी पार्टी, अनुप्रिया पटेल व बीजेपी में सीटों के बंटवारे पर नहीं बनी है सहमति
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 26 Feb 2019, 6:26 PM IST

Apna Dal

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वाराणसी. अपना दल में दूसरी बार टूट हो चुकी है। पहले श्रीमती कृष्णा पटेल व उनकी बेटी अनुप्रिया पटेल के बीच टकराव के चलते पार्टी में दो फोड़ हुआ था और अब प्रतापगढ़ से पार्टी के सांसद रहे कुंवर हरिवंश सिंह ने नयी पार्टी बना कर अपना दल को तोड़ा है। पार्टी में बिखराव से लोकसभा चुनाव 2019 में पटेल वोटरों को साधना कठिन हो जायेगा। अभी तो बीजेपी के साथ सीटों का बंटवारा तक नहीं हुआ।
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स्वर्गीय डा. सोनेलाल पटेल ने पटेल वोटरों को बड़ा राजनीतिक मुकाम दिलाने के लिए 4 नवम्बर 1995 को अपना दल का गठन किया था। कांशीराम के सहयोगी माने जाने वाले डा.सोनेलाल ने नयी पार्टी बनाने के बाद अपने समाज के लिए लड़ाई शुरू की थी। अपना दल को आगे बढ़ाने में डा.सोनेलाल की पत्नी श्रीमती कृष्णा पटेल व उनकी दो बेटी अनुप्रिया पटेल व पल्लवी पटेल ने भी सहयोग किया था। पार्टी नेताओं के सपने उस समय परवान चढऩे लगे थे जब यूपी के पूर्व सीएम राजनाथ सिंह ने अपना दल से गठबंधन किया था। विधानसभा चुनाव में इस गठबंधन को लाभ नहीं मिला था लेकिन अपना दल ने अपना एक वजूद बना लिया था जो बड़े दल को पटेल वोटरों तक पहुंचाने की ताकत रखता था। डा.सोनेलाल के निधन के बाद पार्टी की कमान श्रीमती कृष्णा पटेल व अनुप्रिया पटेल के हाथ में आ गयी थी। वर्ष 2012 में अनुप्रिया पटेल ने पहली बार रोहनिया विधानसभा से चुनाव जीता था इसके बाद वर्ष 2014में बीजेपी के साथ अपना दल ने गठबंधन कर लिया था। श्रीमती कृष्णा पटेल ने मिर्जापुर से अनुप्रिया व प्रतापगढ़ से कुंवर हरिवंश सिंह को प्रत्याशी बनाया था। गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी की लहर के चलते दोनों ही सीट अपना दल को मिली थी इसके बाद अनुप्रिया पटेल को मंत्री बनाने के बाद से परिवार में विवाद शुरू हुआ। मां व बेटी का विवाद इतना बढ़ गया कि अपना दल में पहली बार टूट हुई। इसके बाद अपना दल सोनेलाल व अपना दल कृष्णा पटेल गुट के नाम से पार्टी को जाने लगा। पार्टी के सिंबल का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। अपना दल में दो फाड़ होने के बाद अनुप्रिया व कृष्णा पटेल ने अपने-अपने गुट की ताकत को बढ़ाने के लिए यूपी चुनाव में प्रत्याशी उतारे। श्रीमती कृष्णा पटेल ने खुद रोहनिया से चुनाव लड़ा था जहां पर उन्हें हार का समाना करना पड़ा था जबकि बीजेपी गठबंधन के तहत अपना दल को 11 सीट मिली थी और अनुप्रिया पटेल के प्रत्याशियों ने ९ सीट सेवापुरी, फतेहपुर, जहानाबाद, सोवराव, सदर, विश्वनाथगंज, शोहरतगढ़, दुद्धी, मडिय़ाहू व छानबे सीट पर दर्ज कर यूपी में कांग्रेस से बड़ी पार्टी बना दी थी। इसके बाद कहानी बदलने लगी है और सांसद कुंवर हरिवंश सिंह के अलग पार्टी बनाने से अपना दल में दूसरी बार बिखराव हुआ है।
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पटेल वोटरों को नहीं साध पायेगा कमजोर अपना दल
अपना दल में मां-बेटी की लड़ाई के बाद सांसद के अलग होने से पार्टी कमजोर हुई है। लोकसभा चुनाव 2019 में अपना दल ने बीजेपी व कांग्रेस से गठबंधन करने का संकेत तो दिया है लेकिन पार्टी किस खेमे में जायेगी। इस पर माह के अंत में निर्णय हो सकता है। पटेल वोटरों में सेंधमारी के लिए सपा ने नरेश उत्तम पटेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है और फूलपुर उपचुनाव में सपा को जीत भी मिली थी जहां पर पटेल वोटरों की संख्या बहुत अधिक है। अपना दल नेताओं में जिस तरह से मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं वह पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
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