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Big Issue : 32 साल से कर रहे टॉप, फिर भी नहीं मिलते मेडल
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Big Issue : 32 साल से कर रहे टॉप, फिर भी नहीं मिलते मेडल

अटका हुआ है स्नातक टॉपर्स के पदक का मामला। विश्वविद्यालय नहीं पहुंचा किसी नतीजे पर।
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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 14 Nov 2019, 4:10 PM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

कला, वाणिज्य, विज्ञान संकाय के स्नातक टॉॅपर्स (UG Toppers) को पदक देने का मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) की सुई 32 साल से वहीं अटकी हैं। यह मामला एकेडेमिक कौंसिल और प्रबंध मंडल तक भी पहुंचा पर विश्वविद्यालय किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। दिसंबर में होने वाले नवें दीक्षांत समारोह (convocation) में भी स्नातक टॉपर्स पदक से वंचित रहेंगे।

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मदस विश्वविद्यालय कला, वाणिज्य, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, विधि प्रबंध अध्ययन और अन्य संकाय में एम.ए, एम. कॉम और एम.एस.सी फाइनल में अंकों के आधार पर टॉप (toppers) करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण और रजत पदक देता है। दीक्षान्त समारोह में यह पदक चक्रानुसार (circulation) दिए जाते हैं, ताकि किसी एक संकाय को बार-बार पदक लेने का मौका नहीं मिले।

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विश्वविद्यालय में स्नातक (बीए/बी.कॉम/बी.एससी) स्तर पर टॉपर्स को पदक देने का प्रावधान नहीं है। जबकि देश के कई विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर (UG LEVEL) के टॉपर्स को भी पदक दिए जाते हैं।

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यहां अब तक वंचित
बीते 32 साल में विश्वविद्यालय ने कला, वाणिज्य, विज्ञान संकाय के 60 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों की परीक्षा कराई। इनमें कला, वाणिज्य, विज्ञान संकाय में अंकों के आधार पर टॉप (TOP) करने वाले विद्यार्थियों को कभी पदक (medal) नहीं दिए गए। विश्वविद्यालय ने वर्ष 1987 में स्थापना वर्ष से ही इन्ें पदक देने का कोई प्रावधान नहीं रखा। अब तक हुए 8 दीक्षान्त समारोह में स्नातक स्तरीय टॉपर्स को पदक नहीं दिए गए।

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नहीं हो पाया कोई फैसला
तत्कालीन कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी (kailash sodani) के कार्यकाल में वर्ष 2016 में हुई एकेडेमिक कौंसिल और प्रबंध मंडल की बैठक में स्नातक स्तरीय टॉपर्स (toppers medal) का मुद्दा रखा गया। सदस्यों और अफसरों के तकनीकी अडंगा लगाने से कोई फैसला नहीं हो पाया। विश्वविद्यालय ने परीक्षा और एकेडेमिक विभाग से एक्ट (ACT) खंगालने अथवा नियम बनाने के निर्देश भी नहीं दिए। 3 दिसंबर को नवां दीक्षांत समारोह होना है। इसमें भी स्नातक टॉपर्स को पदक नहीं मिल पाएंगे।

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यह है अड़चन…
-स्नातक टॉपर्स को पदक देने का नहीं बनाया नियम
-विश्वविद्यालय परिसर में नहीं चलते स्नातक कोर्स
-बॉम में दो सम्बद्ध कॉलेज के प्राचार्यों का नहीं प्रतिनिधित्व
-पुनर्मूल्यांकन में अंक बढऩे वाले विद्यार्थियों को शामिल करें या नहीं