
कटनी. बुधवार की शाम साढ़े 4 बजे पूरे शहर में उस समय हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई जब एकाएक कटनी नदी पर निर्माणाधीन साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत के पुल का एक हिस्सा धसक गया। पुल के बैठते ही मजदूरों में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया और उन्होंने कूदफांदकर अपनी जान बचाई। हादसे के बाद से मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। वहीं मौके पर प्रशासनिक व ब्रिज कारपोरेशन के अधिकारी पहुंचे और जांच शुरू कर दी है। साथ ही महापौर शशांक श्रीवास्तव भी जायजा लेने पहुंचे। जानकारी के अनुसार कटनी नदी के पुराने पुल के समकक्ष मप्र सेतु निगम द्वारा पुल का निर्माण कराया जा रहा है। यह कार्य ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला द्वारा किया जा रहा है। जिसके आधे हिस्से के 45 मीटर स्लैब का काम 12 व 13 जुलाई की रात को कराया गया था। बुधवार की शाम जब मजदूर पुल में केबिल को कसने का काम जैक लगाकर कर रहे थे। निर्माण में मुंबई से लाए गए 32 केबिल ग्रुप लगे हैं। ये पुल को स्टैंड रखने के लिए लगाए जा रहे थे। केबिल कसने के दौरान ही एकाएक बस स्टैंड एंड वाले पुल का हिस्सा धसक गया। गनीमती थी कि पूरी तरह से स्लैब धसक कर सैंटिंग में रख गया वरना कई मजदूर हादसे का शिकार हो जाते।
12 साल से चल रहा निर्माण
12 साल से इस पुल का निर्माण चल रहा है, लेकिन अभी एक हिस्से का स्लैब ही ढल पाया था। कटनी नदी पर चांडक चौक के पास अंग्रेजों के जमाने में बने पुराने पुल को आवागमन के लिए अयोग्य घोषित करने के बाद शासन ने वर्ष 2008 में नए ब्रिज के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की थी। मुआवजा राशि सहित 13 करोड़ 69 लाख 86 हजार रुपये जारी किए थे। राशि आवंटन के बाद सेतु निगम ने रीवा की फर्म रामसज्जन शुक्ला की निविदा स्वीकार कर कार्यादेश जारी किए थे। सेतु निगम ने 15 जून 2014 तक ब्रिज का निर्माण कार्य पूर्ण करने के आदेश दिए थे। धीमी गति से काम होने के कारण निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। ठेका कंपनी ने 26 सितंबर 2013 से निर्माण कार्य प्रारंभ किया था।
डिजाइन बनी काम में रोड़ा
शुरुआती दौर में भू-अर्जन की कार्रवाई में विलंब हुआ। भू-अर्जन के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ तो ब्रिज की डिजाइन ने रोड़े अटकाए। सिर्फ दो पिलरों पर टिका 90 मीटर से अधिक पाथ वाला धनुषाकार ब्रिज अब तक देश में कहीं भी नहीं बनाया गया है जिसके कारण सेतु निगम ने डिजाइन को एक्सपर्ट की राय के लिए आइआइटी दिल्ली भेज दी थी। वर्ष 2015 में आइटीआइ ने दो चरणों में धनुषाकार ब्रिज की डिजाइन को अप्रूव किया था। कोलकाता में हुए ब्रिज हादसे के बाद सेतु निगम ने डिजाइन को दोबारा दिल्ली भेजा। 6 माह बाद भी एक्सपर्ट की राय नहीं ली जा सकी और डिजाइन अटक गई। 2017 से काम फिर शुरू हुआ, लेकिन मंथर गति से चल रहा है।
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लोगों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
हादसे के बाद लोगों ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। रामशरण ने कहा कि शासन-प्रशासन ध्यान दें इसका जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। सुरेश गुप्ता ने कहा कि इसमें ठेकेदार द्वारा गुणवत्ताविहीन कार्य कराया गया है। मैटेरियल घटिया लगाया गया है, जिससे हादसा हुआ। जनहित में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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खास-खास:
– पुल निर्माण में लेट-लतीफी के कारण सेतु निगम द्वारा तीन बार किया जा चुका है ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला को ब्लैक लिस्टेड, चौथी बार फिर उसी को दिया गया है काम।
– 45-45 मीटर की दूरी पर दो पिलर बनाकर स्लैब ढालते हुए करना था पुल का निर्माण, अभी एक तरफ की ही बन पाया था स्लैब।
– 2009 से लेकर अभी तक सेतु निगम द्वारा ठेकेदार को 4 करोड़ 25 लाख रुपये का किया जा चुका है भुगतान, ठेकेदार पर अबतक नहीं लगा जुर्माना।
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इनका कहना है
स्लैब का काम जनवरी माह से किया जा रहा है। केबिल टाइटिंग के दौरान यह हादसा हो गया है। कार्य पूरी गुणवत्ता से कराया जा रहा था। इंजीनियरों द्वारा पुल की गलत डिजाइनिंग कर दी गई। 45 मीटर का लंबा रूम होने के कारण यह हादसा हो गया।
रामसज्जन शुक्ला, ठेकेदार।
घटना की जानकारी लगते ही प्रशासनिक अधिकारियों और ब्रिज कार्पोरेशन के अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है। मामले की सूक्ष्मता से जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होगी।
शशिभूषण सिंह, कलेक्टर।
दुर्भाग्यपूर्ण हादसा
हादसा बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है। ठेकेदार ने ठीक से काम नहीं किया। इसमें इंजीनियर भी जिम्मेदार हैं। ब्रिज कोर्पोरेशन के माध्यम से पुल बन रहा था। इसकी प्रॉपर मॉनीटरिंग होनी थी। यह अच्छी बात रही कि पुल बनने के पहले ही पोल खुल गई है। जगह-जगह से पुल में क्रेक हैं। इस पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना चाहिए।
शशांक श्रीवास्तव, महापौर।