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देखिए, सिखों की वीरता और अदम्य साहस, युद्ध में 21 सिख सैनिकों का पराक्रम देख कांप उठी थी 10 हजार हमलावरों की फौज
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देखिए, सिखों की वीरता और अदम्य साहस, युद्ध में 21 सिख सैनिकों का पराक्रम देख कांप उठी थी 10 हजार हमलावरों की फौज

Saragarhi Day, Sikh Soldiers, Indian army: सिखों की वीरता और पराक्रम का लोहा अंग्रेज भी मानते थे। सिख रेजीमेंट से दुर्दांत कबायली डरते थे।
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कोटा

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Zuber Khan

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Sep 13, 2019

कोटा. सारागढ़ी दिवस ( Saragarhi Day ) के अवसर पर गुरुवार को शहीद स्मारक ( martyrs memorial kota ) पर आयोजित कार्यक्रम में सिख समाज ( Sikh society ) की ओर से सिख शहीद सैनिकों ( Sikh Soldiers ) को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ( tribute to martyrs ) सिख एकता मंच और सेना के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा, सिखों की वीरता और पराक्रम का लोहा अंग्रेज भी मानते थे। उन्हें पता था कि सिख रेजीमेंट से दुर्दांत कबायली डरते थे। इसी कारण सारागढ़ी, लोकहार्ट और गुलिस्तां के किलों में सिख रेजीमेंट के जवान तैनात किए गए थे।

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उन्होंने कहा कि सेना की ट्रेनिंग में बताया जाता है कि पहाड़ की लड़ाई में हमलावर सेना एक के मुकाबले 12 सैनिक लेकर आती है। यह सिखों का ही डर था कि कबायली 21 सिख सैनिकों के लिए 10 हजार से अधिक हमलावर लेकर आए। हमलावरों की संख्या अधिक होने के बावजूद सिख सैनिकों ने हवलदार ईशर सिंह के नेतृत्व में उनका जमकर मुकाबला किया। इसी कारण इस युद्ध को युनेस्को ने बहादुरी व पराक्रम से लड़ा गया विश्व का 8वां सर्वश्रेष्ठ युद्ध घोषित किया।

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मंच की ओर से शहर के गुरुद्वारों में शहीदों की याद में अरदास की गई। सेना के अधिकारियों व बैंड के साथ पूर्व सिख सैनिक तथा समाज के लोग भी शामिल हुए। कार्यक्रम में सिख एकता मंच के उपाध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी, सचिव उजागर सिंह, डॉ. जसविंदर सिंह सुखमनी, मनिंदर सिंह, कोषाध्यक्ष भूपिन्दर सिंह आनन्द, कोटा सेंट्रल गुरू सिंह सभा के प्रधान सतपाल सिंह मनचंदा, सचिव जतिन्द्र मोहन सिंह, कोटा के विभिन्न गुरुद्वारों के प्रबंधन समिति के सदस्य भी थे। संचालन सिख एकता मंच के महासचिव जितेंद्र बग्गा ने किया।

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इतिहास में शामिल हो
वेटरन ब्रिगेडियर एनएस कपूर ने कहा कि सारागढ़ी का युद्ध भारतीयों के लिए एक उदाहरण है कि देश के लिए कुर्बान होने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। युवाओं को प्रेरित करने के लिए सारागढ़ी के युद्ध को इतिहास की किताबों में शामिल किया जाना चाहिए। वेटरन कर्नल एवीएस घुम्मन ने कहा, सारागढ़ी युद्ध में सिख सैनिकों ने अपने जज्बे के बूते ही दुश्मनों के दांत खट्टे किए। भारतीय सेना ( Indian army ) आज भी अपने सैनिकों में यही जज्बा भरती है। वीरांगना बबीता शर्मा ने कहा कि सिख सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। हमें उनके परिवारों को तलाश कर सबके सामने लाना चाहिए। सिख एकता मंच के अध्यक्ष गुरपाल सिंह राणा व अन्य कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी सम्बोधित किया।